Who is Pradeep Mishra: चाय बेचने वाला रघु कैसे बन गया देश का नामी कथावाचक प्रदीप मिश्रा?

Who is Pradeep Mishra: देश के जाने-माने कथा वाचक प्रदीप मिश्रा और प्रेमानंद महाराज के बीच जुबानी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। प्रदीप मिश्रा द्वारा राधाजी के विषय में दिए गए बयान के बाद से ही उनपर...
who is pradeep mishra  चाय बेचने वाला रघु कैसे बन गया देश का नामी कथावाचक प्रदीप मिश्रा

Who is Pradeep Mishra: देश के जाने-माने कथा वाचक प्रदीप मिश्रा और प्रेमानंद महाराज के बीच जुबानी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। प्रदीप मिश्रा द्वारा राधाजी के विषय में दिए गए बयान के बाद से ही उनपर चारों ओर से जुबानी प्रहार जारी है। प्रेमानंद महाराज ने उनकी कड़े शब्दों में निंदा की है। इस विवाद के बाद काफी लोगों के मन में यह प्रश्न उठ रहा है कि आखिर प्रदीप हैं कौन हैं और उनकी पृष्ठभूमि क्या है? इस खबर में हम उनके सफर के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

सीहोर में हुआ था प्रदीप मिश्रा का जन्म

प्रदीप मिश्रा का जन्म 4 जुलाई, 1980 को मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में हुआ था। उनके पिता का नाम रामेश्वर दयाल मिश्रा है। उनके परिवार में माता-पिता के अलावा दो भाई, पत्नी और बच्चे शामिल हैं। मिश्रा की स्कूल शिक्षा सीहोर में ही हुई थी और कॉलेज की पढ़ाई करने के लिए वह भोपाल चले गए थे। उन्होंने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से स्नातक (बीकॉम) किया था। इतना ही नहीं उन्होंने धार्मिक ग्रंथों का गहन अध्ययन भी किया है।

बेहद गरीबी में गुजरा था मिश्रा का बचपन

प्रदीप का पालन-पोषण एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता पहले तो चने का ठेला लगाया करते थे और बाद में चाय की थड़ी लगाते थे। चाय की आमदनी से उनके पूरे परिवार का भरण-पोषण होता था। प्रदीप भी बचपन में अपने पिता के काम में हाथ बंटाया करते थे और लोगों को चाय पिलाया करते थे। चाय की थड़ी से इतनी ही कमाई होती थी कि पूरे परिवार को दो वक्त का भोजन मिल सके।

किनसे मिली कथा करने की प्रेरणा और कौन हैं प्रदीप मिश्रा के गुरु? 

प्रदीप मिश्रा को कथा करने की प्रेरणा गीता बाई पाराशर नामक महिला से मिली थी। गीता एक ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखती थीं और दूसरों के घरों में खाना बनाकर गुजारा करती थीं। गीता के कहने पर मिश्रा गुरुदीक्षा लेने के लिए इंदौर गए। वहां उन्हें गोवर्धन नाथ हवेली जी मंदिर के विठलेश राय काका जी ने दीक्षा दी। बताया जाता है कि काका जी ने उन्हें आशीर्वाद दिया था कि उनका पंडाल हमेशा भक्तों से भरा रहेगा।

एक लोटा जल समस्या का हल

प्रदीप मिश्रा ने सीहोर से ही पहली बार शिव कथा कहनी शुरू की थी। वह शुरुआत से ही अपनी कथाओं में एक वाक्य कहते आ रहे हैं जिससे उन्हें प्रसिद्धि मिली। वह कहते हैं "एक लोटा जल समस्या का हल"। उनके कहने का मतलब होता है कि अगर आप भगवान शिव को रोजाना एक लोटा जल चढ़ाते हैं तो आपकी सभी समस्याओं का हल हो जाएगा। उनकी यह बात लोगों को पसंद आई और देखते ही देखते उनकी प्रसिद्धि देश-दुनिया में फैल गई। वर्तमान में सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग उन्हें फॉलो करते हैं। वह अपने फॉलोअर्स से सदैव 'श्री शिवाय नमस्तुभ्यं' कहने की अपील करते हैं।

प्रदीप के किस ताजा बयान से पैदा हुआ विवाद?

मिश्रा इन दिनों सीहोर में ही कथा वाचन कर रहे हैं। 3 दिन पूर्व उन्होंने बयान दिया था कि श्रीकृष्ण की 16,108 पटरानियों में राधाजी की गिनती नहीं होती है। उन्होंने दावा किया था कि राधाजी के पति का नाम श्रीकृष्ण नहीं है। उनका विवाह तो अनय घोष नामक व्यक्ति से हुआ था और वह छाता ग्राम के निवासी थे। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा था कि राधा जी की सास का नाम जटिला और ननद का कुटिला था। मिश्रा ने जोर देकर कहा था कि राधाजी बरसाने की निवासी नहीं थी वह तो रावल गांव में पैदा हुई थी। बरसाने में तो राधाजी के पिता की कचहरी थी और राधाजी वहां वर्ष में सिर्फ एक बार ही जाती थीं।

प्रेमानंद महाराज ने प्रदीप मिश्रा को जमकर लगाई लताड़

प्रदीप मिश्रा के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए राधाजी के अनन्य भक्त प्रेमानंद महाराज अपनी कथा में मिश्रा को खूब खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने कहा कि हमारे इष्ट पर सवाल उठाने वाले को नरक में भी जगह नहीं मिलेगी। राधाजी के बारे में बोलने वाले तुझे नरक से कोई नहीं बचा सकता है। जिस भगवान से जीविकापार्जन हो रहा है उसी भगवान की निंदा करने से बुरा कुछ नहीं हो सकता। जिसे धर्मग्रंथों के बारे में ज्ञान नहीं है उन्हें राधाजी के बारे में बोलने का कोई अधिकार ही नहीं है। प्रेमानंद महाराज ने कहा कि राधाजी के बारे में तो भगवान ब्रह्रा तक नहीं जान पाए थे।

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