Balaghat Govt School: दो अध्यापकों ने बदल डाली सरकारी स्कूल की दशा, बच्चों को मिल रही है प्राइवेट स्कूल जैसी पढ़ाई और सुविधा

Balaghat Govt School: बालाघाट। कहते हैं शिक्षक समाज का वो आईना है जो खुद को अंधेरे में रखकर दूसरों के घरों को रोशन करता है। बालाघाट जिले के खैरलांजी विकासखण्ड के गांव टेकाड़ीघाट में भी एक ऐसा ही उदाहरण सामने...
balaghat govt school  दो अध्यापकों ने बदल डाली सरकारी स्कूल की दशा  बच्चों को मिल रही है प्राइवेट स्कूल जैसी पढ़ाई और सुविधा

Balaghat Govt School: बालाघाट। कहते हैं शिक्षक समाज का वो आईना है जो खुद को अंधेरे में रखकर दूसरों के घरों को रोशन करता है। बालाघाट जिले के खैरलांजी विकासखण्ड के गांव टेकाड़ीघाट में भी एक ऐसा ही उदाहरण सामने आया है। यहां शासकीय प्राथमिक विद्यालय (Balaghat Govt School) में पदस्थ शिक्षिका सकून प्रधान ने विद्यार्थियों का जीवन इस तरह रोशन किया कि हर कोई उनके इस कदम की सराहना करने से अपने आप को नहीं रोक पा रहा। शिक्षिका ने अपने निजी खर्चे से स्कूल की सूरत बदल डाली।

दूसरे सरकारी स्कूलों से अलग है यह स्कूल

आमतौर पर सरकारी स्कूल का नाम सुनते ही बदहाल व्यवस्था, अनुशासन न होना, शिक्षक का बच्चों पर पूरा ध्यान नहीं देना, आराम फरमाते अध्यापक जैसे ख्याल मन में आने लगते हैं। इस सोच को बदलने की कोशिश प्रदेश के कुछ शिक्षक कर रहे हैं। इन्हीं शिक्षिकों में से एक सकून प्रधान हैं, जिन्होंने टेकडीघाट गांव के बच्चों में शिक्षा की अलख जगाई है। टेक्नोलॉजी से परिपूर्ण और कबाड़ से शिक्षा की जुगाड ने शाला का परीक्षा परिणाम 93 प्रतिशत तक पहुंचाया है। सरकारी शिक्षिका की इस अनोखी पहल को हर कोई तारीफ कर रहा है। विशेष तौर पर नौनिहाल बच्चे के पालक भी इस सोच और परीक्षा परिणाम से बच्चों को प्राइवेट स्कूल में ना भेजते हुए सरकारी स्कूल में भेज रहे हैं।

पांचवी कक्षा तक होती है पढ़ाई

जानकारी के अनुसार शासकीय प्राथमिक शाला टेकाडी घाट में कक्षा पहली से पांचवीं तक कक्षाएं संचालित हैं। प्रधान पाठिका सकून प्रधान और शिक्षक निर्दोष चौधरी ही दो शिक्षक पदस्थ हैं। इन्हीं दो शिक्षकों की ऐसी मेहनत होती हैं कि वह बच्चों को शिक्षित करने के लिए पालकों से सीधा संपर्क कर प्रवेश के लिए प्रेरित करते हैं। इन्हीं शिक्षकों की पहल से आज 64 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, जिसमें 29 बालक व 34 बालिकाएं अध्यनरत हैं। सत्र 2023- 2024 के परीक्षा परिणाम में उनकी मेहनत रंग लाई है।

गत सत्र में क़रीब 75 से अधिक बच्चों की संख्या थी और उन्हीं में से कक्षा पांचवी का परीक्षा परिणाम 93 प्रतिशत तक रहा जो ब्लॉक में प्राइवेट स्कूल को पीछे छोड़ते हुए प्रथम स्थान हासिल किया था। इस परीक्षा परिणाम का कारण है कि आधुनिक तकनीक के साथ एलईडी स्क्रीन और कंप्यूटर के माध्यम से पढ़ाई होती है। यही नहीं, शाला भवन के रंगरोगन से शिक्षण सामाग्री तक की व्यवस्था की गई है। शाला भवन के चारों ओर हरियाली ही हरियाली दिखाईं पड़ती है, फूलों के पौधे लगाए हैं। शौचालय की अच्छी व्यवस्था एवं ने के पानी के लिए वॉटर फिल्टर की उत्तम व्यवस्था है। गर्मी से निजात दिलाने के लिए पंखे की व्यवस्था की गई है।

Balaghat Govt School

एलईडी टीवी से पढ़ाई

प्रधान पाठिका सकून प्रधान ने बताया कि आज कल तो बच्चे आधुनिकता की ओर बढ़ रहे। इसी के चलते गांव के ही एक व्यक्ति ने स्कूल (Balaghat Govt School) को एक बड़ी एलईडी टीवी दान की है। आज उसी टीवी से बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ कार्टून दिखाए जाते हैं जिससे कि बच्चों का मन स्कूल के प्रति लगा रहे। इसी वजह से बच्चे प्रतिदिन स्कूल आते हैं। यही नहीं, परिसर में तीन कक्ष में कक्षा लगती है जिसमें पहली से दूसरी कक्षा साथ बैठते हैं वह तीसरी से चौथी के बच्चे साथ में पढ़ते हैं। कक्षा पांचवी के बच्चों को अलग से शिक्षा दी जाती है। बच्चों को कंप्यूटर भी पढ़ाया जाता है। यहां पर दो कंप्यूटर भी रखे गए हैं, ये कंप्यूटर भी निजी खर्चे पर लाए गए हैं।

कबाड़ से पढ़ाई का जुगाड़

कबाड़ से पढ़ाई का जुगाड़ बना कर बच्चों को शिक्षित करते नहीं सुना होगा लेकिन शिक्षिका ने घरेलू कबाड़ से पढ़ाई का जुगाड़ बना कर बच्चों का भविष्य संवारने का मन बना रखा है। स्कूल में आयरन की गोली बच्चों को देने के बाद दवाईयों के खाली बॉक्स को अंग्रेजी अल्फाबेट में बदल दिए। फटके और बांस से हिंदी वर्णमाला व हिंदी गिनती बनाई। पुराने टेलीफोन, वन्यप्राणी के कार्टून, खड्डा से चित्रांकन, कार्टून के चार्ट, हिंदी वर्णमाला में दर्शाए गए शब्द के चित्रांकन व्यवस्था सहित अन्य बच्चों के पढ़ाई के लिए कबाड़ से जुगाड़ कर बनाया गया है।

गांव वालों का सहयोग

शिक्षा के इस जगत को और उच्च स्तर पर ले जाने के लिए प्राईवेट स्कूल प्रबंधन को पीछे छोड़ते हुए सरकारी स्कूल की प्रधान ने जो कर दिखाया है, उसकी गांव के सभी लोग तारीफ करते दिखाईं पड़ रहे हैं। यहीं नहीं, गांव के व्यक्तियों ने वाटर फिल्टर और एलईडी टीवी दान की है, जिससे बच्चों को शुद्ध जल मिल रहा हैं वहीं एलईडी टीवी से पढ़ाई कर रहे हैं। यहां सरकारी स्कूल में महंगे प्राइवेट स्कूलों जैसी सुविधा बच्चों को मिल रही हैं।

हमारा स्कूल जिले में प्रथम आने की कोशिश - सकून प्रधान

स्कूल (Balaghat Govt School) की प्रधानाध्यापिका सकून प्रधान ने कहा कि हजारों रुपए खर्च कर बच्चों को सुविधा के साथ पढ़ाई कराने के लिए हर कोई पालक सक्षम नहीं होता है। इन्हीं कारणों से बच्चे को प्राइवेट स्कूल में नहीं पढ़ा पाते हैं। लेकिन हमने भी सोचा है कि बच्चों को जो सुविधा प्रायवेट स्कूल में मिलती है, वह सुविधा हम उपलब्ध करा पाए और उसी के तहत हम बच्चों को एलईडी टीवी, कम्प्यूटर, कबाड़ से पढ़ाई का जुगाड़ कर बच्चे को शिक्षित कर रहे हैं।

यह उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि उनके स्कूल ने इस साल आए परीक्षा परिणाम में ब्लॉक में प्राइवेट स्कूल को पीछे रखते हुए 93 प्रतिशत का परीक्षा परिणाम का लक्ष्य हासिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि अब हमारा प्रयास है कि आने वाले समय में हमारा स्कूल पूरे जिले में प्रथम स्थान पर आए, उसके लिए बच्चों को शिक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। इस स्कूल में पिछले एक वर्ष से दो ही शिक्षक हैं अगर शासन हमें और शिक्षक दे तो हमें पढ़ाई कराने में मदद मिलेगी।

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