Burhanpur : केले का तना कैसे लाया 600 महिलाओं के जीवन में खुशहाली ? पैसों के साथ मिली वाहवाही

Burhanpur News : बुरहानपुर। आम के आम गुठलियों के दाम यह कहावत आपने भी खूब सुनी होगी। मगर अब बुरहानपुर में केले के केले और तने का भी दाम वाली कहावत सुनाई जाएगी। क्योंकि यहां 600 महिलाएं केले के तने...
burhanpur   केले का तना कैसे लाया 600 महिलाओं के जीवन में खुशहाली   पैसों के साथ मिली वाहवाही

Burhanpur News : बुरहानपुर। आम के आम गुठलियों के दाम यह कहावत आपने भी खूब सुनी होगी। मगर अब बुरहानपुर में केले के केले और तने का भी दाम वाली कहावत सुनाई जाएगी। क्योंकि यहां 600 महिलाएं केले के तने से ऐसे उत्पाद बना रही हैं, जिनकी भारी डिमांड हो रही है और महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है।

केले के तने से शो-पीस बना रहीं महिलाएं

बुरहानपुर जिले में 600 महिलाएं केले के तने से अपनी किस्मत चमका रही हैं। महिलाएं केले के तने से कई सजावटी उत्पाद बना रही हैं। जिनकी बिक्री से महिलाओं की आमदनी हो रही है, वहीं लोगों को सजाने के लिए पर्यावरण के अनुकूल शो-पीस मिल रहे हैं। महिलाओं को यह आइडिया कैसे आया और कैसे इस सफर की शुरुआत हुई, यह भी आपको बताते हैं।

केले के तने को फेंक देते थे किसान

बुरहानपुर जिले में 23 हजार से ज्यादा रकबे में केले की फसल होती है। फल लेने के बाद किसान केले के तने को वेस्ट मानकर फेंक देते हैं या जला देते हैं। मगर अब इस केले के वेस्ट से महिलाओं के कदम आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। महिलाएं केले के तने से आकर्षक कलाकृतियां और रोजमर्रा के जीवन में काम आने वाली चीजें बना रही हैं।

केले के तने से बन रहे ईको फ्रेंडली उत्पाद

बुरहानपुर की 600 महिलाएं केले के तने से झूला, टोकरी, चटाई, पेन स्टैंड, टेबल मैट, इको फ्रेंडली राखियां, फर्टिलाइजर जैसी चीजें बना रही हैं, जो घरेलू जरुरत की हैं और बिल्कुल ईको फ्रेंडली हैं। इको फ्रेंडली होने की वजह से इन उत्पादों की डिमांड स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि पूरे राज्य से आ रही है।

भोपाल सहित पूरे राज्य में डिमांड

महिलाएं अभी केले के तने से बना मेट तमिलनाडु की एक संस्था को 200 रुपये मीटर के हिसाब से बेच रही हैं। जबकि शोपीस और घरेलू जरुरत की अन्य चीजों को भोपाल सहित स्थानीय बाजार में बेच रही हैं।(Burhanpur News)

600 महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर

महिलाओं को इस काम के लिए ग्रामीण आजीविका मिशन में स्टार स्वरोजगार योजना के तहत प्रशिक्षण दिया गया। जिसके बाद 600 से ज्यादा महिलाएं आत्मनिर्भर बन गई हैं। केले के तने से बने उत्पादों की बिक्री से उन्हें अच्छी खासी आमदनी हो रही है। जिससे इनके जीवन स्तर में भी सुधार हुआ है।

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