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Bada Ganesh Mandir: 500 वर्षों से भी अधिक प्राचीन है नलखेड़ा में गजानन की गोबर से बनी प्रतिमा, होती है हर मनोकामना पूरी

Bada Ganesh Mandir: मालवा। सनातन धर्म में भक्त अलग-अलग तरह से ईश्वर की आराधना करते हैं। इसके लिए अलग-अलग धातुओं या वस्तुओं से देव प्रतिमा बनाने का भी विधान बताया गया है। ऐसी ही एक अद्भुत प्रतिमा मध्य प्रदेश के...
08:10 PM Sep 11, 2024 IST | MP First

Bada Ganesh Mandir: मालवा। सनातन धर्म में भक्त अलग-अलग तरह से ईश्वर की आराधना करते हैं। इसके लिए अलग-अलग धातुओं या वस्तुओं से देव प्रतिमा बनाने का भी विधान बताया गया है। ऐसी ही एक अद्भुत प्रतिमा मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले में है। आगर मालवा जिले के नलखेड़ा नगर के मध्य गणेश दरवाजे पर अत्यंत ही प्राचीन बड़ा गणपति जी की मूर्ति (Bada Ganesh Mandir) विराजमान है। पुरातत्ववेत्ताओं के अनुसार यह प्रतिमा 500 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है। इस प्रतिमा की सबसे खास बात यह है कि यह गोबर से बनी हुई है। दस दिवसीय गणेशोत्सव पर्व के दौरान गोबर की यह मूर्ति श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगी। कहते है यहां भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है।

अत्यन्त प्राचीन है यह प्रतिमा

नगर के मुख्य द्वार पर स्थित इस प्रतिमा की स्थापना किसने की है, इसका उल्लेख कहीं नहीं मिलता है। परन्तु प्रसिद्ध पुरातत्वविद् स्व. विष्णु श्रीधर वाकणकर (उज्जैन) जब नलखेड़ा आए थे तब उन्होंने इस प्रतिमा को विश्व की एकमात्र गोबर से निर्मित प्रतिमा बताया था। उन्होंने कहा था कि यह प्रतिमा 500 वर्ष से अधिक प्राचीन है। इस प्रतिमा की उंचाई लगभग 10 फीट से अधिक है।

पुरातत्ववेत्ताओ तथा किवदंतियों के अनुसार राजा नल की नगरी नलखेडा में पांडवकालीन पीतांबरा सिद्धपीठ मां बगलामुखी का प्राचीन मंदिर होने से यह नगर देश सहित विदेशों में भी प्रसिद्धि प्राप्त कर रहा है। सैकड़ों वर्ष पूर्व नलखेड़ा नगर गांव के रुप में पूर्व दिशा में 2 किलोमीटर दूर बल्ड़ावदा हनुमान मंदिर की पहाड़ी पर बसा हुआ था। प्राकृतिक आपदाओं के कारण उस वक्त का नलखेड़ा गांव जमीदोंज हो गया। इसके बाद ग्वालियर रियासत के तात्कालिक महाराजा माधवराव सिंधिया (मोतीवाला) के एक मराठा सूबेदार ने नलखेड़ा नगर को नया स्वरूप दिया। उन्होंने ही नगर की सुरक्षा के लिए चारों ओर ऊंची दीवारों का परकोटा बनाया गया।

नगर की सुरक्षा के लिए दरवाजों पर बिठाए थे गणपति और मां पार्वती

नए नगर की स्थापना करते समय नगर की सुरक्षा के लिए चार दिशाओं में चार दरवाजे भी बनाए गए, जिनके अवशेष आज भी हैं। इनमे से दो गणेश दरवाजा एवं सती दरवाजा आज भी प्रचलन में हैं। एक दरवाजे के मुहाने पर गणपतिजी की विशालकाय मूर्ति स्थापित है। इसी कारण इसका नाम गणेश दरवाजा रखा गया। नलखेड़ा नगर के धार्मिक इतिहास को देखकर पूर्व शंकराचार्य व भारत माता मंदिर हरिद्वार के संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी व जैन संत जिनचंद्र सूरिजी, बीकानेर (राजस्थान) ने कहा था कि जिस नगर के मुख्य द्वार पर गणेश (Bada Ganesh Mandir) व दाहिने हाथ पर मां जगदंबा भवानी विराजमान हों, वहां आपदाएं नहीं आती हैं।

गणपति के साथ हैं रिद्धि-सिद्धि भी

गणेश जी की इस विशालकाय प्रतिमा के निकट ही रिद्धि-सिद्धि की प्रतिमाएं भी विराजित हैं। इस मंदिर को शासन से प्राप्त राशि से नया स्वरूप प्रदान किया गया है। नए स्वरूप में गणपति प्रतिमा के नीचे कमल के फूल का निर्माण भी करवाया गया। इससे अब ऐसा स्वरूप दिखाई पडता है कि भगवान श्रीगणेश कमल के फूल पर विराजित हैं। इसके साथ ही मंदिर में आकर्षक लाईट व्यवस्था के साथ गर्भगृह को भी बडा किया गया है।

प्रत्येक शुभ कार्य मे दिया जाता है निमंत्रण

बड़ा गणपति को नगर का प्रमुख देव भी माना जाता है। नगर सहित आसपास के हिन्दू परिवारों में शादी विवाह के साथ अन्य कोई शुभ कार्य होता है तो उनके द्वारा सर्वप्रथम भगवान बड़े गणपति जी को ही निमंत्रण पत्र दिया जाता है। गणपति को निमंत्रण देकर उनसे विनती की जाती है कि उनका वह कार्य विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की कृपा से निविघ्न रूप से संपन्न हो जाए। इसी तरह नवदंपति भी अपने सफल वैवाहिक जीवन की मंगलकामना लेकर भगवान श्री गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं।

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