Sheetla Mata Mandir Gwalior: जंगलों के बीच पहाड़ी पर विराजमान हैं मां शीतला, मन्नत पूरी होने पर भक्त चढ़ाते हैं घंटा
Sheetla Mata Mandir Gwalior: ग्वालियर। किसी समय मराठा राजनीति का केंद्र रहा ग्वालियर अपने मंदिरों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां एक से बढ़कर ऐतिहासिक और चमत्कारी मंदिर हैं। ग्वालियर का प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर भी ऐसा ही एक चमत्कारी मंदिर है जिसमें दर्शन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आइए जानते हैं इस प्राचीन सिद्ध मंदिर के बारे में
500 वर्ष पुराने मंदिर में डकैत भी आते थे दर्शन करने
लगभग 500 वर्ष पुराना यह मंदिर दुर्गम पहाडी और जंगलों के बीच बना हुआ है। फिर भी प्रत्येक नवरात्रि पर यहां लाखों भक्त बिना अपनी परेशानियों या अन्य समस्याओं की परवाह किए आकर माता के दर्शन करते है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि कभी यहां डकैत भी दर्शन करने के लिए थे और मन्नत पूरी होने पर घंटा भी चढा़ते थे। उनके साथ-साथ पुलिस वाले भी मां के इस मंदिर मे सिर झुकाते हैं।
जंगली जानवरों ने आज तक नहीं पहुंचाया किसी भक्त को नुकसान
आपको बता दें कि मां शीतला का मंदिर (Sheetla Mata Mandir Gwalior) घने जंगलों में होने के कारण यहां पर जंगली जानवरों का भी खतरा अक्सर बना रहता है। लेकिन आज तक किसी भी जंगली जानवर ने किसी भी श्रद्धालु पर और मां के दर्शन करने आने वाले भक्तों पर कभी हमला नहीं किया है। मंदिर के पुजारियों ने बताया कि कभी यहां पर पत्थर के 7 टुकड़े हुआ करते थे और आज यहां पर एक विशाल मंदिर है। कभी यहां पर चंबल के कुख्यात डकैत पूजा अर्चना करने के लिए आया करते थे और मां के सामने सिर झुकाते थे।
मन्नत पूरी होने पर डकैत चढ़ाते थे मंदिर में घंटा
मां शीतला घने जंगलों में पहाड़ी के बीच विराजमान हैं इसलिए यहां पर डकैतों का अक्सर आना-जाना लगा रहता था। चंबल के कुख्यात डकैत यहां पर आकर घंटा चढ़ाया करते थे। चंबल का बड़े से बड़ा डकैत यहां पर माथा टेकने के लिए आता था। कुख्यात डकैत मोहर सिंह, मलखान सिंह, दयाराम रामबाबू गडरिया गैंग भी यहां पर घंटा चढ़ाने आया करती थी। डकैतों ने कभी भी इस इलाके मे लोगों को परेशान नही किया और न ही मंदिर पर आने वाले किसी भक्त के साथ किसी तरह की वारदात को अंजाम दिया।
भक्त की भक्ति से प्रसन्न होकर मां ने दिए थे दर्शन
माता के भक्त गजाधर मंदिर के पास ही बने गांव सातऊ में रहते थे। वह भिंड जिले की गोहद के पास खरौआ में एक प्राचीन देवी मंदिर में नियमित रूप से गाय के दूध से माता का अभिषेक करते थे। महेंद्र गजाधर की भक्ति से प्रसन्न होकर देवी मां कन्या के रूप में प्रकट हुई और महेंद्र को अपने साथ ले चलने के लिए कहा। गजाधर ने माता से कहा कि उनके पास कोई साधन नहीं है वह उन्हें अपने साथ कैसे ले जाए।
मां ने स्वयं चुना था अपने मंदिर का स्थान
इस पर माता ने कहा कि वह जब उनका ध्यान करेंगे वह प्रकट हो जाएगी। गजाधर ने सातऊ पहुंचकर माता का आह्वान किया तो देवी प्रकट हो गई और गजाधर से मंदिर बनवाने के लिए कहा। गजाधर ने माता से कहा कि वह जहां विराजेंगी, उसी स्थान पर मंदिर (Sheetla Mata Mandir Gwalior) बना दिया जाएगा। माता सातऊ गांव के बाहर निकल कर जंगल में पहाड़ी पर विराजमान हो गई। तब से महंत गजाधर के वंशज इस मंदिर में पूजा अर्चना करते आ रहे हैं। अब मां शीतला की महिमा इतनी बढ़ गई है कि नवरात्रि के दिनों में दूर-दूर से उनके भक्त दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं।
यह भी पढ़ें: