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Janmashtami 2024: कब मनाई जाएगी जन्माष्टमी? नोट कर लीजिये सही तारीख और पूजा मुहूर्त

Janmashtami 2024: भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाने वाला त्योहार जन्माष्टमी पूरे भारत और दुनिया भर में बड़ी भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है। भगवान कृष्ण का जन्म हिन्दू महीने भाद्रपद (अगस्त-सितंबर) में कृष्ण पक्ष के रोहिणी...
01:12 PM Jul 03, 2024 IST | Preeti Mishra

Janmashtami 2024: भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाने वाला त्योहार जन्माष्टमी पूरे भारत और दुनिया भर में बड़ी भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है। भगवान कृष्ण का जन्म हिन्दू महीने भाद्रपद (अगस्त-सितंबर) में कृष्ण पक्ष के रोहिणी नक्षत्र की अष्टमी को हुआ था। इसीलिए इस दिन जन्माष्टमी (Janmashtami 2024) मनाया जाता है।

इस वर्ष कब है जन्माष्टमी

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष जन्माष्टमी, सोमवार, 26 अगस्त को मनाया जाएगा। यह भगवान श्रीकृष्ण का 5251वां जन्मोत्सव होगा। वहीं जन्माष्टमी (Janmashtami 2024) व्रत के बाद पारण का समय 27 अगस्त को दोपहर 02:08 बजे के बाद है। कुछ लोग पूजा के बाद आधी रात को भी पारण करते हैं। जो लोग ऐसा करते हैं उनके लिए समय रात 12 बज कर 44 मिनट के बाद पारण करना उचित होगा। निशिता पूजा का समय, 26 अगस्त को रात 11 बज कर 56 मिनट से 27 अगस्त रात 12 बज कर 44 मिनट तक है। यानि पूजा के लिए शुभ अवधि कुल 48 मिनट्स की होगी।

अष्टमी तिथि प्रारम्भ - अगस्त 25, 2024 को रात 02:09 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त - अगस्त 26, 2024 को 12:49 बजे

रोहिणी नक्षत्र प्रारम्भ - अगस्त 26, 2024 को 14:25 बजे
रोहिणी नक्षत्र समाप्त - अगस्त 27, 2024 को 14:08 बजे

जनमाष्टमी का इतिहास

जन्माष्टमी का इतिहास वैदिक काल से जुड़ा है। इस त्यौहार का उल्लेख महाभारत में किया गया है। महाभारत कृष्ण के जीवन और कार्यों की कहानी बताता है, जिसमें उनका जन्म, बचपन और वयस्कता शामिल है। जन्माष्टमी का सबसे पहला ज्ञात उत्सव दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में आयोजित किया गया था। यह उत्सव मथुरा में आयोजित किया गया था, जहां कृष्ण का जन्म हुआ था। समय के साथ जन्माष्टमी तेजी से लोकप्रिय हो गई और भारत के अन्य हिस्सों में भी फैल गई। 10वीं शताब्दी तक यह त्योहार देश के सभी हिस्सों में मनाया जाने लगा। आज जन्माष्टमी हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह पूरी दुनिया में हिंदुओं द्वारा बड़ी धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व

जन्माष्टमी हिंदुओं के लिए अपने प्रिय देवता कृष्ण के जन्म का जश्न मनाने का समय है। यह आनंद, भक्ति और चिंतन का समय है। कृष्ण हिंदू धर्म में एक लोकप्रिय देवता हैं और अपने प्रेम, करुणा और ज्ञान के लिए पूजनीय हैं। उन्हें अक्सर एक शरारती बच्चे के रूप में चित्रित किया जाता है, लेकिन वह अपने वीरतापूर्ण कार्यों के लिए भी जाने जाते हैं। जन्माष्टमी हिंदुओं के लिए कृष्ण में अपनी आस्था को नवीनीकृत करने और उनका आशीर्वाद पाने का समय है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाने और उज्जवल भविष्य की आशा करने का समय है।

जन्माष्टमी की परंपराएं और रीति-रिवाज

जन्माष्टमी कई तरह की परंपराओं और रीति-रिवाजों के साथ मनाई जाती है। कुछ सबसे आम परंपराओं में शामिल हैं:

उपवास: भक्त अक्सर जन्माष्टमी के दिन उपवास करते हैं। शाम तक भोजन और पानी से परहेज करते हैं। यह कृष्ण के प्रति भक्ति दिखाने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के तरीके के रूप में किया जाता है।

भजन कीर्तन: भक्त भजन कीर्तन करने के लिए एकत्रित होते हैं। इस दिन भगवान कृष्ण की स्तुति की जाती है। यह कृष्ण के प्रति अपना प्रेम व्यक्त करने और उनका आशीर्वाद पाने का एक तरीका है।

कृष्ण की पूजा: भक्त भगवान कृष्ण की पूजा करने के लिए मंदिरों में जाते हैं।

कृष्ण के जन्म का अभिनय: कुछ समुदायों में, कृष्ण के जन्म का दोबारा अभिनय किया जाता है। यह उस घटना को मनाने और कृष्ण के प्रति भक्ति को प्रेरित करने के लिए किया जाता है।

विशेष खाद्य पदार्थ खाना: भक्त जनमाष्टमी मनाने के लिए विभिन्न प्रकार के विशेष खाद्य पदार्थ तैयार करते हैं। इन खाद्य पदार्थों में अक्सर खीर, लड्डू और बर्फी शामिल होते हैं।

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