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Maha Kumbh Mela 2025: प्रयागराज में होगा महाकुंभ का भव्य आयोजन, जाने किस तारीख को है शाही स्नान

हिन्दू धर्म में बहुत से व्रत, उत्सव और पर्व आते हैं। इन सब में महाकुंभ का विशेष महत्व है। महाकुंभ उत्सव धर्मिक दृष्टि से भारत का बहुत सबसे महत्वपूर्ण उत्सव है।
02:02 PM Nov 19, 2024 IST | Jyoti Patel
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Maha Kumbh Mela 2025

Maha Kumbh Mela 2025 : हिन्दू धर्म में बहुत से व्रत, उत्सव और पर्व आते हैं। इन सब में महाकुंभ का विशेष महत्व है। महाकुंभ उत्सव धर्मिक दृष्टि से भारत का बहुत सबसे महत्वपूर्ण उत्सव है। आपको बता दें, महाकुंभ बारह साल में एक बार आता है, जिसके कारण इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है। इस बार महाकुंभ मेला अगले साल यानि साल 2025 में लगने जा रहा है। महाकुंभ मेले में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं। महाकुंभ का आयोजन चार तीर्थ स्थानों पर ही किया जाता है। इसका आयोजन प्रयागराज के संगम , हरिद्वार में गंगा नदी, उज्जैन में शिप्रा नदी, और नासिक में गोदावरी नदी पर किया जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि महाकुंभ के दौरान पवित्र नदी में डुबकी लगाने से व्यक्ति को हर तरह के रोग-दोष और पापों से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं साल 2025 में कब से कब तक लगेगा महाकुंभ और कहां लगेगा महाकुंभ का मेला।

कहां -कहाँ लगेगा महाकुंभ मेला ?

आपको बता दें, इस बार महाकुंभ का मेला साल 2025 में प्रयागराज में आयोजित किया जाएगा। इस मेले के आयोजन को लेकर प्रशासन अभी से इसकी तैयारियों में जुट गया है। श्रद्धालओं की सुरक्षा के लिए चप्पे-चप्पे पर कैमरे लगाये जा रहें हैं। इसके अलावा प्रोफेशनल गोताखोर की भी ड्यूटी लगाई गई है।

कब से कब तक चलेगा महाकुंभ मेला ?

आपको बता दें, हिन्दू पंचांग के अनुसार पौष पूर्णिमा के दिन महाकुंभ आरंभ होगा और महाशिवरात्रि के साथ ही यह समाप्त होगा। साल 2025 में महाकुंभ 13 जनवरी से आरंभ होगा और 26 फरवरी 2025 को समाप्त होगा। यह महाकुंभ पूरे 45 दिन तक रहेगा।
महाकुंभ 2025 शाही स्नान की तिथियां
13 जनवरी 2025- पौष पूर्णिमा स्नान
14 जनवरी 2025- मकर संक्रांति स्नान
29 जनवरी 2025- मौनी अमावस्या स्नान
03 फरवरी 2025- बसंत पंचमी स्नान
12 फरवरी 2025- माघी पूर्णिमा स्नान
26 फरवरी 2025- महाशिवरात्रि स्नान

कैसा होता स्थान का चयन?

महाकुंभ लगने का निर्णय देवताओं के गुरु बृहस्पति और ग्रहों के राज्य सूर्य की स्थिति के हिसाब से किया जाता है। आइए जानते हैं किस स्थान पर मेला लगेगा इसका निर्णय कैसे होता है।
हरिद्वार- जब देवगुरु बृहस्पति कुंभ राशि में और सूर्यदेव मेष राशि में होते हैं तब हरिद्वार में महाकुंभ का आयोजन किया जाता है।
उज्जैन- जब सूर्यदेव मेष राशि में और गुरु ग्रह सिंह राशि में होते हैं कुंभ मेले का आयोजन उज्जैन में किया जाता है।
नासिक- जब गुरु गृह और सूर्य देव दोनों ही सिंह राशि में विराजमान रहते हैं तो महाकुंभ मेले का आयोजन स्थल नासिक होता है।
प्रयागराज- जब गुरु ग्रह बृहस्पति वृषभ राशि में और ग्रहों के राजा मकर राशि में होते हैं तो महाकुंभ का आयोजन प्रयागराज में किया जाता है।

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