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Mangala Gauri Vrat 2024: इस बार सावन के महीने में पड़ेंगे चार मंगला गौरी व्रत, जानें क्यों होता है यह सुहागिनों के लिए खास?

Mangala Gauri Vrat 2024: सावन का महीना न केवल भगवान शिव को बल्कि देवी पार्वती को भी प्रिय है। इस महीने के दौरान, देवी पार्वती को समर्पित मंगला गौरी व्रत (Mangala Gauri Vrat 2024) हर मंगलवार को मनाया जाता है।...
02:26 PM Jul 19, 2024 IST | Preeti Mishra

Mangala Gauri Vrat 2024: सावन का महीना न केवल भगवान शिव को बल्कि देवी पार्वती को भी प्रिय है। इस महीने के दौरान, देवी पार्वती को समर्पित मंगला गौरी व्रत (Mangala Gauri Vrat 2024) हर मंगलवार को मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त सावन के महीने दौरान सोमवार या मंगलवार को देवी पार्वती और भगवान शिव की पूजा करते हैं, उन्हें जीवन के सभी सुख और आराम मिलते हैं।

सावन महीने में मंगला गौरी व्रत (Mangala Gauri Vrat 2024) विवाहित महिलाएं और अविवाहित लड़कियां दोनों ही रखती हैं। ऐसा माना जाता है कि मंगला गौरी व्रत रखने से अविवाहित लड़कियों को एक उपयुक्त और वांछित जीवन साथी मिलता है। वहीं स्त्रियां, मुख्यतः नवविवाहित स्त्रियां सुखी वैवाहिक जीवन के लिये माता गौरी का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु इस व्रत को करती हैं।

इस बार सावन में पड़ेंगे चार मंगला गौरी व्रत

इस बार सावन के महीने में जहां पांच सोमवार पड़ रहे हैं वहीं मंगला गौरी व्रत भी चार बार पड़ेंगे।

प्रथम मंगला गौरी व्रत - जुलाई 23, 2024, मंगलवार
द्वितीय मंगला गौरी व्रत- जुलाई 30, 2024, मंगलवार
तृतीय मंगला गौरी व्रत- अगस्त 6, 2024, मंगलवार
चतुर्थ मंगला गौरी व्रत- अगस्त 13, 2024, मंगलवार

मंगला गौरी व्रत का समय

अभिजीत मुहूर्त 23 जुलाई, 30 जुलाई और 6 अगस्त को दोपहर 12:00 बजे से 12:55 बजे तक होता है। हालाँकि, 13 अगस्त को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:59 बजे शुरू होता है और दोपहर 12:52 बजे समाप्त होता है।

मंगला गौरी व्रत में अनुष्ठान

- ब्रह्म मुहूर्त में या सूर्योदय से पहले उठें। स्नान करने के बाद साफ-सुथरे नए कपड़े पहन लें।
- एक लकड़ी की मेज को लाल रंग के कपड़े से ढक दें। कपड़े पर मां गौरी की तस्वीर या मूर्ति की व्यवस्था करें।
- आटे का मिट्टी का दीपक जलाएं। पूरे दिन उपवास करने का निर्णय लें।
- भक्तिपूर्वक देवी का सम्मान करें। मां गौरी को फूल और फल चढ़ाएं।
- आरती करने के लिए दीपक और धूप जलाएं।

मंगला गौरी व्रत के पीछे की कहानी

मंगला गौरी व्रत के दिन अनुष्ठान पूरा करने के बाद, महिलाएं मंगला गौरी व्रत के पीछे की कहानी पढ़ती या सुनीति हैं।

कहानी इस प्रकार है: बहुत समय पहले, एक शहर में धर्मपाल नाम का एक व्यापारी रहता था। उसके पास बहुत सुन्दर पत्नी और पर्याप्त धन था। लेकिन, वे बिल्कुल भी खुश नहीं थे क्योंकि उनकी कोई संतान नहीं थी। भगवान की कृपा से उन्हें एक पुत्र प्राप्त हुआ जो दुर्भाग्य से अल्पायु था क्योंकि उसे सोलह वर्ष की आयु में साँप के काटने से मृत्यु का श्राप मिला था। लेकिन सौभाग्य से, उस लड़के की शादी सोलह वर्ष की आयु पुराण करने के पहले ​​पहले ही एक लड़की से हो गई थी, जिसकी मां मंगला गौरी व्रत रखती थी। परिणामस्वरूप, उन्हें एक बेटी का आशीर्वाद मिला जिसे कभी विधवापन का सामना नहीं करना पड़ेगा। अत: धर्मपाल के पुत्र ने सौ वर्ष की आयु प्राप्त की। इस प्रकार, सभी नवविवाहित महिलाओं को यह पूजन करना चाहिए और लंबे, स्थिर और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इस व्रत का पालन करना चाहिए। जो लोग व्रत नहीं रख सकते उन्हें कम से कम पूजा तो करनी ही चाहिए।

पवित्र कथा सुनने के बाद विवाहित महिलाएं अपनी सास और ननद को 16 लड्डुओं का भोग लगाती हैं। इसके बाद, वे वही प्रसाद एक ब्राह्मण को देते हैं। इस अनुष्ठान को पूरा करने के बाद, भक्त देवी के सामने 16 बाती वाले दीपकों की आरती करते हैं। अगले दिन यानी बुधवार को देवी मंगला गौरी की मूर्ति को किसी तालाब या झील में विसर्जित कर दिया जाता है। परिवार की खुशहाली के लिए यह पूजन और व्रत लगातार पांच वर्षों तक किया जाता है।

इस पूजा में सोलह की संख्या का है बहुत महत्व

मंगला गौरी व्रत में सोलह की संख्या का बहुत महत्व है। देवी को जो भी वास्तु अर्पित की जाती है उसकी सांख्य सोलह होनी चाहिए। देवी को इस दिन पूजा में सोलह माला, सोलह लड्डू, सोलह प्रकार के फल, पाँच प्रकार के मेवे सोलह बार, सात प्रकार के अनाज सोलह बार, जीरा सोलह बार, धनिया सोलह बार, पान के पत्ते सोलह, सुपारी सोलह, लौंग, सोलह इलायची, साड़ी और सोलह चूड़ियों सहित सौंदर्य प्रसाधनों की विभिन्न वस्तुओं से भरी डिबिया देवी को अर्पित करनी चाहिए।

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