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Navratri 2024: नवरात्रों में ये पाठ करने से पूरी होंगी हर मनोकामना, मातारानी होंगी प्रसन्न

Navratri 2024 : हिन्दू धर्म में नवरात्रि का बहुत महत्व है। नवरात्रि में लोग अलग-अलग तरीके से माँ दुर्गा की पूजा अर्चना करतें हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में भक्त माँ को प्रसन्न करने के लिए हर संभव उपाय...
09:43 AM Oct 06, 2024 IST | Jyoti Patel
Navratri 2024

Navratri 2024 : हिन्दू धर्म में नवरात्रि का बहुत महत्व है। नवरात्रि में लोग अलग-अलग तरीके से माँ दुर्गा की पूजा अर्चना करतें हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में भक्त माँ को प्रसन्न करने के लिए हर संभव उपाय भी करते हैं। कुछ लोग अपने काम की वजह से व्यस्त होते हैं तो ऐसे में पूजा पाठ के लिए ज्यादा समय नहीं निकाल पातें हैं। इसलिए वे सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं। यह बहुत ही प्रभावशाली और फलदायी माना जाता है। इस पाठ के बारे में कहा जाता है, कि इस पाठ को करने से जीवन की सारी चिंताएं दूर हो जाते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है, कि कुंजिका स्तोत्र के मंत्र बहुत प्रभावशाली हैं। इन मंत्रों का जाप करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इसका पाठ दुर्गा सप्तशती के पाठ के बराबर माना जाता है। यह स्तोत्र श्री श्रीरुद्रयामल के मन्त्र द्वारा पुष्ट है तथा इसे सिद्ध करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यह बेहद चमत्कारी स्त्रोत है। कहा जाता है इस स्तोत्र के पाठ से मनुष्य की पांच मूल समस्याएं हल हो जाती हैं।

पाठ करने में होती है कठनाई

अगर किसी व्यक्ति को दुर्गा सप्तशती का पाठ करने में कठिनाई होती है, या किसी कारण से उनके पास पाठ करने का समय नहीं है। तो उसे सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। यह पाठ सरल तो है ही लेकिन बहुत अधिकत प्रभावशाली भी है। कुंजिका स्तोत्र का जाप करने से भी संपूर्ण सप्तशती के जाप का फल प्राप्त हो जाता है। ऐसे में नवरात्रों में ये पाठ करना बहुत शुभ मना जाता है।

पाठ के नियम

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ आप किसी भी समय कर सकतें हैं। लेकिन अगर शाम कि पूजा के समय इसका पाठ किया जाता हैं, तो इसका प्रभाव बहुत जल्दी होता है। पाठ शुरू करने से पहले देवी के सामने दीपक जलाएं, लाल आसन पर लाल वस्त्र पहन कर बैठ जाएं। इसके बाद माता को धूपबत्ती, दीपक और फूल चढ़ाएं और कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें। इस पाठ को आप एकांत और शांति से करें। इसे पूरा करने के लिए जल्दबाजी न करें।

श्रीरुद्रयामल के गौरीतंत्र में वर्णित सिद्ध कुंजिका स्तोत्र

शिव उवाच

शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम्।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजाप: भवेत्।।1।।
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्।।2।।
कुंजिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्।
अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम्।।3।।
गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति।
मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्।
पाठमात्रेण संसिद्ध् येत् कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम्।।4।।

अथ मंत्र :-

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौ हुं क्लीं जूं स:!!
ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा।'

।।इति मंत्र:।।
नमस्ते रुद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि।
नम: कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिन।।1।।
नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिन।।2।।
जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे।
ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका।।3।।
क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते।
चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी।।4।।
विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मंत्ररूपिण।।5।।
धां धीं धू धूर्जटे: पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी।
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देविशां शीं शूं मे शुभं कुरु।।6।।
हुं हु हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी।
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः।।7।।
अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं
धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा।।
पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा।। 8।।
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मंत्रसिद्धिंकुरुष्व मे।।
इदंतु कुंजिकास्तोत्रं मंत्रजागर्तिहेतवे।
अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति।।
यस्तु कुंजिकया देविहीनां सप्तशतीं पठेत्।
न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा।।

 

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