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Pitru Paksha 2024: इस विधि से पितरों का श्राद्ध करने से घर में आएगी सुख-समृद्धि, पितृदोष से मिलेगा छुटकारा

Pitru Paksha 2024: हिंदू धर्म में हर साल पितृ पक्ष मनाया जाता है। पितृ पक्ष मनाने का मुख्य कारण अपने पूर्वजो को प्रसन्न करना है, जो कि अब इस दुनिया में नहीं रहें हैं। पितृपक्ष  सोलह दिन के लिए मनाया...
11:23 AM Sep 12, 2024 IST | Jyoti Patel
Pitru Paksha 2024

Pitru Paksha 2024: हिंदू धर्म में हर साल पितृ पक्ष मनाया जाता है। पितृ पक्ष मनाने का मुख्य कारण अपने पूर्वजो को प्रसन्न करना है, जो कि अब इस दुनिया में नहीं रहें हैं। पितृपक्ष  सोलह दिन के लिए मनाया जाता हैं। कहा जाता है, कि इस दौरान अपने पूर्वजो का श्राद्ध करने से पितरों का ऋण उतरता है, और उनकी आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती हैं।

हिन्दू धर्म में हर साल पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से लेकर अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि तक पितृ पक्ष मनाये जातें हैं। इतना ही नहीं पितृ-पक्ष के दौरान किसी भी प्रकार के शुभ-मांगलिक कार्य नहीं किये जातें हैं। इस साल पितृपक्ष 17 सितंबर 2024 से शुरू होकर 2 अक्तूबर 2024 को तक चलेंगे।

श्राद्ध करने की विधि

धार्मिक मान्यता के अनुसार हर साल हम अपने घर पर अपने पितरो का श्राद करते हैं। इस दौरान श्राद तिथि का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है, क्योकि श्राद हमेशा तिथि के अनुसार ही होता है। अगर किसी को तिथि याद नहीं है, तो आप सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध कर्म कर सकते हैं। श्राद करने के लिए सबसे पहले स्नान करके साफ वस्त्रों को पहनें। इतना ही नहीं इस दौरान घर की साफ-सफाई के साथ-साथ साफ़ सुथरे ढंग से पितरो के लिए भोग तैयार करें। पितृपक्ष में सूर्यदेव के रूप में ही पितरों को पूजा जाता है। इसलिए आप सूर्यदेव को अर्ध्य दें। इसके बाद घर की दक्षिण दिशा में दीपक जलाएं। ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होंगे।

पसंद का भोजन करें तैयार

भोग के लिए आप अपने पूर्वजो के मनपसंद खाना बना सकतें हैं। इसके बाद इस भोजन का पहला भोग पांच तरह के जीव यानी कौवा, गाय, कुत्ता, चींटियों और देवताओं को लगाएं।

भोग लगाने के बाद पितरों की तस्वीर के सामने धूप लगाकर उनकी पूजा करें। इस दौरान सफेद वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए, जैसे, सफेद फूल, उड़द, गाय का दूध, घी, खीर, चावल, मूंग आदि। अब पितरों को भोजन का भोग लगाएं, और ग्रहण करने की प्रार्थना करें। इसके बाद आप ब्राह्मणों को भोजन कराएं, और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-दक्षिणा दें। ऐसा करने से आपके घर में सुख-शांति बनी रहती है।

श्राद्ध की सभी मुख्य तिथियां

17 सितंबर मंगलवार पूर्णिमा का श्राद्ध (ऋषियों के नाम से तर्पण)
18 सितंबर बुधवार प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध (पितृपक्ष आरंभ)
19 सितंबर गुरुवार द्वितीया तिथि का श्राद्ध
20 सितंबर शुक्रवार तृतीया तिथि का श्राद्ध
21 सितंबर शनिवार चतुर्थी तिथि का श्राद्ध
22 सितंबर शनिवार पंचमी तिथि का श्राद्ध
23 सितंबर सोमवार षष्ठी और सप्तमी तिथि का श्राद्ध
24 सितंबर मंगलवार अष्टमी तिथि का श्राद्ध
25 सितंबर बुधवार नवमी तिथि का श्राद्ध
26 सितंबर गुरुवार दशमी तिथि का श्राद्ध
27 सितंबर शुक्रवार एकादशी तिथि का श्राद्ध
29 सितंबर रविवार द्वादशी तिथि का श्राद्ध
30 सितंबर सोमवार त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध
1 अक्टूबर मंगलवार चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध
2 अक्टूबर बुधवार सर्व पितृ अमावस्या (समापन)

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