मध्य प्रदेशराजनीतिनेशनलअपराधकाम की बातहमारी जिंदगीधरम करममनोरंजनखेल-कूदवीडियोधंधे की बातपढ़ाई-रोजगारदुनिया

Yamraj Mandir Gwalior: ग्वालियर में है यमराज का प्राचीन सिद्ध मंदिर, यहां पूजा करने से मिलता है सीधा स्वर्ग

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में यमराज का एक ऐतिहासिक मंदिर है। इस मंदिर में यमराज, भगवान शिव और मार्कंडेय ऋषि के साथ विराजमान हैं।
01:17 PM Oct 30, 2024 IST | Suyash Sharma

Yamraj Mandir Gwalior: ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में यमराज का एक ऐतिहासिक मंदिर है। इस मंदिर में यमराज, भगवान शिव और मार्कंडेय ऋषि के साथ विराजमान हैं। बताया जाता है कि मंदिर की स्थापना सिंधिया राजवंश के राजाओं द्वारा लगभग 300 साल पहले की गई थी। यमराज को मृत्यु का देवता कहा जाता है इसलिए यमराज का नाम सुनकर अच्छे-अच्छों की बोलती बंद हो जाती है। ऐसा भी कहा जाता है कि यह देश का एकमात्र यमराज मंदिर है।

ग्वालियर में है यमराज का प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर

ग्वालियर में फूल बाग़ स्थित मार्कन्डयेश्वर महादेव मंदिर में यमराज (Yamraj Mandir Gwalior) की प्रतिमा है। हर वर्ष रूप चौदस यानि छोटी दीपावली को भगवान यमराज की पूजा अर्चना का प्रचलन है। दीपावली के एक दिन पहले नरक चौदस, जिसे रूप चौदस भी कहा जाता है, के अवसर पर सूबे के इकलौते यमराज मंदिर में भक्तों का सुबह से ही तांता लगना शुरू हो जाता है। इस दिन प्राचीन यमराज मंदिर में विशेष पूजा अर्चना का आयोजन किया जाता है जिसमें बड़ी संख्या में शहर सहित दूर दराज से भक्त पहुचते हैं एवं भगवान यमराज का अभिषेक कर उनकी पूजा अर्चना करते हैं। साथ ही यमराज से मन्नत मांगी जाती है कि वह उन्हें अंतिम समय में किसी भी तरह का कोई कष्ट ना दें।

भगवान शिव के वरदान के कारण होती है यमराज की पूजा

वास्तव में नरक चौदस पर यमराज की पूजा अर्चना करने को लेकर एक पौराणिक कथा है। मान्यताओं के अनुसार यमराज ने जब भगवान शिव की तपस्या की, तब महादेव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर यमराज को वरदान दिया था कि आज से तुम हमारे गण माने जाओगे और दीपावली से एक दिन पहले जो भी तुम्हारी पूजा-अर्चना और अभिषेक करेगा, उसे सांसारिक जीवन से मुक्ति मिलने के बाद उसकी आत्मा को कम से कम यातनाएं सहनी होंगी और स्वर्ग की प्राप्ति होगी। तभी से नरक चौदस या रूप चौदस को यमराज की विशेष पूजा अर्चना की जाती है।

नरक चौदस पर देश भर से आते हैं श्रद्धालु

इस पावन मौके पर यमराज की पूजा अर्चना भी वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष तरीके से की जाती है। सर्वप्रथम यमराज (Yamraj Mandir Gwalior) की प्रतिमा पर घी, तेल, पंचामृत, इत्र, दूध, दही, शहद एवं फूल-माला आदि से उनका अभिषेक किया जाता है। उनके नजदीक दीपदान किया जाता है। इसमें चांदी के चौमुखे दीपक से यमराज की आरती उतारी जाती है जिसमें बड़ी संख्या में भक्तजन हिस्सा लेते हैं। यह मंदिर देश में अकेला होने के कारण पूरे देश की श्रद्धा का केंद्र है और यहां नरक चौदस के अवसर पर देश भर के श्रद्धालु आते हैं।

यह भी पढ़ें:

Mandre Ki Mata Temple: सिंधिया राजघराने की कुलदेवी हैं ‘मांढरे की माता’, इनके दर्शन मात्र से मिलती है अद्भुत शांति

Ichchha Devi Temple: सभी की इच्छा पूरी करने वाली इच्छी देवी की महिमा है अपरंपार, 400 साल पुरानी परंपरा आज भी जीवित!

Tripura Sundari Temple: पहाड़ों पर बिराजी हैं राज राजेशश्वरी त्रिपुर सुंदरी देवी की 8 वर्षीय बेटी मां बाला भवानी, जानें महिमा

Tags :
dharma karmaHindu templesMadhya Pradesh Latest NewsMadhya Pradesh Newsmp firstMP First NewsMP Latest NewsMP newsYamraj MandirYamraj Mandir GwaliorYamraj Mandir in indiaYamraj Mandir MPएमपी फर्स्टएमपी फर्स्ट न्यूज़मध्य प्रदेश न्यूज़मध्य प्रदेश लेटेस्ट न्यूज

ट्रेंडिंग खबरें

Next Article