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Parenting Tips: अभिभावकों का ऐसा व्यवहार बच्चे की मेंटल हेल्थ को कर सकता है खराब

Parenting Tips: आज के समय में बच्चों की परवरिश किसी चुनौती से कम (Parenting Tips) नहीं है। बच्चों को कैसे रहना है या लोगों के साथ उनका व्यवहार कैसे होगा, ऐसी कुछ बातें सिखाना हर माता-पिता की जिम्मेदारी होती है।...
05:34 PM May 31, 2024 IST | Juhi Jha

Parenting Tips: आज के समय में बच्चों की परवरिश किसी चुनौती से कम (Parenting Tips) नहीं है। बच्चों को कैसे रहना है या लोगों के साथ उनका व्यवहार कैसे होगा, ऐसी कुछ बातें सिखाना हर माता-पिता की जिम्मेदारी होती है। हमेशा कहा जाता है कि बच्चे का पहला शिक्षक उसके माता-पिता ही होते है। क्योंकि जो माता-पिता कहते है बच्चा वहीं समझता है।आज हम आपको अभिभावकों द्वारा जाने-अनजाने में किए जाने वाले कुछ ऐसे ही व्यवहार के बारे में बताने जा है जो कहीं ना कहीं आपके बच्चे के मेंटल हेल्थ को खराब कर सकता है।

दूसरे बच्चों से तुलना करना

यह माता-पिता का एक बेसिक नेचर होता है। जहां वह अपने बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से करने लगते है। लेकिन यह सबसे खराब चीज है। जिसका असर बच्चे के दिमाग पर काफी लंबे समय तक रहता है। जिसकी वजह से उसके मन में दूसरे लोगों के प्रति घृणा, हीनभावना आने लगती है और साथ ही वह दूसरे बच्चों से खुद को कम समझने लगते है। धीरे-धीरे उनमें आत्मविश्वास की कमी होने लगती है। जिससे वह सबसे दूर अपनी ही दुनिया में रहने लगते है।

भावनात्मक जरूरतों को नजरअंदाज

कई बार माता-पिता अपने कार्यो में इतना व्यस्त होते है कि वह अपने बच्चे पर सही से ध्यान नहीं दे पाते। अपने बच्चे के भावनात्मक जरूरतों को अनदेखा करना एक तरह से बच्चे को खुद से दूर करने जैसा ही होता है। जहां बच्चा अपनी मन की बातें, फीलिंग और विचार खुल कर शेयर नहीं कर पाता। ऐसी परिस्थिति में परेशान होने की जगह माता-पिता बच्चे की भावनात्मक जरूरतों को नजरअंदाज ना करे और साथ ही बच्चे के साथ समय व्यतीत करें और उनकी बातों को समझने की कोशिश करें।

इमोशनल ब्लैकमेल

कई बार माता-पिता बच्चों को उनकी गलती का अहसास कराने के लिए जाने-अनजाने में बच्चों को अपराधी जैसा फील करवाने लगते है। उन्हें ऐसा फील करवाते है कि उन्होंने बहुत बड़ी गलती ​की है जिसके लिए वह अपराधी है। यहां पर माता-पिता को समझने की जरूरत है कि गलती हर किसी से होती है। लेकिन बच्चे जब तक गलती नहीं करेंगे तब तक वह उन चीजों को नहीं समझ पाएंगे। इसलिए उन्हें गल​ती का अहसास दिलाने की जगह उन्हें समझाएं और साथ ही उन्हें सही और गलत के बीच में अंतर करना समझाएं। क्योंकि अपराधी जैसा फील कराना एक तरह से बच्चे को इमोशनल ब्लैकमेल करना होता है। इससे बच्चा अगली बार गलती करने से डरेगा और करेगा भी तो उसे छुपाने के लिए झूठ का सहारा लेने लगेगा।

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