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Burhanpur News: हाई कोर्ट ने मुगलों की संपत्ति पर वक्फ बोर्ड के मालिकाना हक को नकारा

Burhanpur News: मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड (Madhya Pradesh Waqf Board) को जबलपुर हाई कोर्ट (Jabalpur High Court) से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने मुगल बादशाह शाहजहां की बहू की संपत्ति को वक्फ बोर्ड का हिस्सा मानने से इनकार...
12:01 PM Aug 03, 2024 IST | Manoj Kumar Sharma

Burhanpur News: मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड (Madhya Pradesh Waqf Board) को जबलपुर हाई कोर्ट (Jabalpur High Court) से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने मुगल बादशाह शाहजहां की बहू की संपत्ति को वक्फ बोर्ड का हिस्सा मानने से इनकार कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब वक्फ बोर्ड ने तय किया है कि हम इस मामले में लड़ाई आगे भी जारी रखेंगे। आइए इस खबर के बारे में और अधिक जानते हैं।

बुरहानपुर स्थित तीन पुरातात्विक महत्व की धरोहर बेगम शाह शुजा का मकबरा, आदिल शाह नादिर शाह फारूकी का मकबरा और बीबी की मस्जिद के गजट नोटिफिकेशन में वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज होने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (Archaeological Survey of India) ने इसे लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने एएसआई के पक्ष में फैसला देते हुए इन तीनों संपत्तियों को एएसआई के अधीन मानते हुए वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज गजट नोटिफिकेशन से हटाने का आदेश दिया।

पुरातत्वविदों ने किया स्वागत

इस फैसले का बुरहानपुर के पुरातत्वविदों ने स्वागत किया है। उनका तर्क है कि अगर पुरातात्विक महत्व की धरोहर वक्फ बोर्ड के अधीन आती तो धरोहर का स्वरूप बदल दिया जाता है। अब एएसआई के अधीन रहने से उनका प्राचीन स्वरूप बरकरार रहेगा। पुरातत्वदिनों का कहना है कि एएसआई को बुरहानपुर की इन तीनों धरोहरों को सही संरक्षण देना चाहिए और इसकी सही जानकारी स्थल पर अंकित करनी चाहिए।

ऐसे समझिए पूरा मामला

आपको बता दें कि शहर की तीनों ऐतिहासिक धरोहरों शाह सुजा और बिलकिस बेगम का मकबरा, आदिल शाह नादिर शाह का मकबरा और बीवी की मस्जिद गजट में वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज थी। इसलिए बोर्ड ने इसे अपनी संपत्ति घोषित किया था। यह बात 2013 की है जब मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड ने एक आदेश जारी कर तीनों ऐतिहासिक धरोहरों को अपनी संपत्ति घोषित कर दिया था। बाद में इसके खिलाफ एएसआई ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

एएसआई ने कोर्ट को बताया था कि प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम 1904 के तहत प्राचीन संरक्षित स्मारक की श्रेणी में इन इमारत को रखा गया है। एएसआई ने इन पर से दावा भी नहीं छोड़ा है, ऐसे में वक्फ बोर्ड इन संपत्तियों को स्वयं की कैसे घोषित कर सकता है। इस फैसले की सुनवाई पूरी होने के बाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति गुरपाल सिंह अहलूवालिया की अदालत ने एएसआई के पक्ष में फैसला सुनाया।

विशेषज्ञों ने ये कहा...

जिला पुरातत्व एवं पर्यटन परिषद के सदस्य इतिहासकार और पुरातत्व विद कमरुद्दीन फलक ने कहा है कि एएसआई को सिर्फ ऐतिहासिक धरोहरों को अपने स्वामित्व में लेने भर से काम नहीं चलेगा। उनका संरक्षण और विकास भी किया जाना बेहद जरूरी है। वर्तमान में इन तीनों धरोहरों के साथ ही अन्य धरोहरों की दैनिक हालात पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि पुरातत्व विभाग को जल्द ही इनके संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने वक्फ बोर्ड में संपत्तियों की देखरेख के लिए नियुक्त किए जाने वाले पदाधिकारी की योग्यता और चयन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।

फैसले पर वक्फ बोर्ड ने क्या कहा?

कोर्ट के फैसले के बाद बुरहानपुर वक्फ बोर्ड जिलाध्यक्ष का बयान सामने आया है। उन्होंने इस फैसले पर कहा कि पहले फैसले का पूरा अध्ययन किया जाएगा और उसके बाद कानूनी सलाहकारों की मदद से इस फैसले को लेकर डबल बैंच में अपील की जाएगी। हम इस लड़ाई को आगे जारी रखेंगे।

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