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Chanderi Laxman Mandir: चंदेरी के इस मंदिर में हर वर्ष अपने छोटे भाई लक्ष्मण से मिलने आते हैं भगवान राम

Chanderi Laxman Mandir: अशोकनगर। सर्वार्थ सिद्धि योग में शनिवार को डोल ग्यारस एकादशी मनाई गई। एकादशी से गणेश जी की विदाई का सिलसिला शुरू हो जाता है। पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु...
03:41 PM Sep 15, 2024 IST | MP First

Chanderi Laxman Mandir: अशोकनगर। सर्वार्थ सिद्धि योग में शनिवार को डोल ग्यारस एकादशी मनाई गई। एकादशी से गणेश जी की विदाई का सिलसिला शुरू हो जाता है। पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है। इस दिन भगवान कृष्ण के बाल रूप का जल विहार पूजन किया जाता है इसलिए इसे डोल ग्यारस कहते हैं। अशोकनगर जिले की ऐतिहासिक नगरी चंदेरी में बड़े ही धूमधाम, उत्साह और भव्यता के साथ डोल ग्यारस पर चल समारोह निकाला जाता है। इस अवसर पर यहां के लक्ष्मण मंदिर (Chanderi Laxman Mandir) को भव्यता के साथ सजाया गया।

भगवान राम के बिना विराजमान हैं यहां पर भाई लक्ष्मण

चंदेरी के लक्ष्मण मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है कि इस मंदिर में लक्ष्मण जी अपने बड़े भ्राता भगवान राम के बिना ही दर्शन देते हैं। यद्यपि इस परिसर में भगवान श्रीकृष्ण, हनुमान जी और शंकर जी का भी मंदिर है। बताया जाता है कि पूरे देश में यह ऐसा पहला और अनोखा मंदिर है जहां लक्ष्मणजी अपने भाई के बिना दर्शन देते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि डोल ग्यारस के दिन भगवान राम अपने अनुज लक्ष्मण से मिलने के लिए यहां आते हैं। आपको बता दें कि ऐतिहासिक नगरी चंदेरी में हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर लक्ष्मण मंदिर जाकर पूजन अर्चना की थी।

बुंदेली तर्ज पर तैयार किया गया है मंदिर

परमेश्वर ताल के निकट स्थित लक्ष्मण मंदिर के लिए कहा जाता है कि इसे 18वीं सदी में 7वें बुंदेली राजा अनिरुद्ध सिंह द्वारा बनवाया गया था। हालांकि एक स्तंभ की नक्काशी और कुछ मूर्तियों से संकेत मिलता है कि यह मंदिर और भी अधिक पुराने काल का है, संभवतः गुर्जर प्रतिहार काल का हो सकता है। मंदिर की मुख्य प्रतिमा के रूप में शेषनाग विराजमान हैं। मंदिर के मध्य में एक बड़ा तालाब होने से इस मंदिर की खूबसूरती और अधिक बढ़ गई है।

चंदेरी के डोल ग्यारस पर्व का है बड़ा महत्व

इस मंदिर से निकलने वाली विमान यात्रा का बहुत अधिक महत्व है। यहां पर जो भी अपने घर के सामने विमान को रोकता है या छेड़ता है, उसे अपने समाज के लिए भंडारा करना पड़ता है और दूसरे दिन विमान अपने मंदिर पर पहुंचता है। इस बार मंदिर को भव्य बनाने के लिए प्रशासन द्वारा सजाया गया है, इसमें ग्यारहसौ दीपकों से साथ ग्यारह पंडितों के द्वारा महाआरती भी गई। इस बार मंदिर में चल समारोह मंदिर पर चल समारोह पहुंचा जहां पर जिला कलेक्टर ने परिवार सहित पहुंच कर महाआरती एवं पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर कलेक्टर की पत्नी द्वारा रामजानकी जी के गाने पर प्रस्तुति भी दी गई।

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