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गरीबों के इलाज का सपना हुआ धराशायी! 5 रुपए की कमी पर अस्पताल में मां-बेटी की दुर्दशा

Dewas Government Hospital News देवास: जीने का हक सबको है। शायद यही वजह है कि महंगाई के इस दौर में कोई इलाज से वंचित न रह जाए इसके लिए सरकार ने आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Yojana) की शुरुआत की है।...
12:07 PM Oct 15, 2024 IST | Amit Sharma

Dewas Government Hospital News देवास: जीने का हक सबको है। शायद यही वजह है कि महंगाई के इस दौर में कोई इलाज से वंचित न रह जाए इसके लिए सरकार ने आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Yojana) की शुरुआत की है। लेकिन, देवास जिले में एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। जहां, पांच रुपए कम होने पर एक बेबस मां को बेटी का बिना इलाज कराए अस्पताल से लौटना पड़ा है। आखिर क्या है पूरा मामला आइए विस्तार से जानते हैं।

देवास शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के हाल बेहाल

वैसे तो सरकार गरीबों को मुफ्त इलाज देने की बात (Dewas Government Hospital News) करती है, लेकिन देवास के नेमावर में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां सरकार के गरीबों को मुफ्त इलाज देने के दावे खोखले साबित होते नजर आ रहे हैं। दरअसल 5 रुपए कम होने पर बिना इलाज के ही मां-बेटी को नेमावर शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लौटना पड़ा है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, एक मां अपनी जली हुई रोती बिलखती मासूम बेटी का इलाज करवाने के लिए घर से 20 रुपए लेकर शासकीय अस्पताल के लिए निकली थी। जहां मां-बेटी दोनों ने पर्ची बनवा ली, जब पैसे देने की बारी आई तो महिला के पास मात्र 15 रुपए ही निकले। इस बात को लेकर स्वास्थ्य विभाग (Dewas Government Primary Health Center) के कर्मचारियों और महिला के बीच बहस बाजी भी हो गई। बहसबाजी के बाद दोनों मां-बेटी को बगैर इलाज के ही शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से घर लौटना पड़ा।

5 रुपए कम होने पर मां-बेटी को बिना इलाज के ही लौटना पड़ा

वहीं, इस पूरे मामले में जब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉ. राहुल उइके से बात की गई तो  उन्होंने कहा कि,  "पर्ची वाला मामला मेरे संज्ञान में भी आया है। इस मामले में संजीदगी से जांच के बाद ही विस्तार में कुछ कहा जा सकता है। आखिर पूरा मामला क्या है, अभी इस पर जल्दबाजी में कुछ भी नहीं कहा जा सकता। इस पूरे मामले की जांच की जाएगी।" बहरहाल अब देखना यह है कि उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्थिति में सुधार होता है या भी हालात यूं ही बने रहेंगे।

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