Dussehra 2024: रावण की भक्ति में डूबा जबलपुर का संतोष, बेटों का नाम भी रखा मेघनाथ और अक्षय!
Dussehra 2024: जबलपुर। जिले सहित देश भर में दशहरा पर रावण का दहन किया जाता है। भारत में दशहरा का महत्व काफी ज्यादा माना जाता है। कहा जाता है कि दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मनाया जाता है। कई जगह रावण को दहन करने की परंपरा भी है। इस दिन पुतले के रूप में रावण का दहन किया जाता है। साथ ही हमारे अंदर की बुराई को भी खत्म करने का पर्व होता है। रावण को लंकेश भी कहा जाता है। आपने कई जगह रावण दहन की खबरें तो काफी सुनी होंगी लेकिन जबलपुर में रावण को मानने वाला एक अनन्य भी है, जो इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है।
संतोष रावण को मानते हैं गुरु
जबलपुर में एक ऐसा भक्त भी है जो रावण की बड़े ही भाव से पूजा करता है। रावण को अपना गुरू मानने वाले पेशे से दर्जी संतोष नामदेव को लोग उसके वास्तविक नाम से नहीं बल्कि ‘लंकेश’ रावण की पूजा करने के कारण ही जानते हैं। आस-पास के गांव के साथ-साथ समूची संस्कारधानी और प्रदेश एवं देश भर के लोग उन्हें लंकेश के रूप में ही जानने लगे। संतोष नामदेव के जीवन में लंकेश रावण का ऐसा असर है कि उसने अपने बेटों के नाम भी रावण के बेटों के नाम पर मेघनाथ और अक्षय रखा।
जबलपुर के पाटन गांव में रहने वाले संतोष नामदेव उर्फ लंकेश यूं तो पेशे से दर्जी हैं लेकिन रावण के इतने बड़े भक्त हैं कि वह नवरात्रि में रावण की प्रतिमा स्थापित कर विधि विधान से पूजा करते हैं। रावण भक्ति के यह सिलसिला 49 सालों से बदस्तूर जारी है। रावण की भक्ति और पूजन के कारण केवल आस-पास के गांव के लोग नहीं बल्कि नाते रिश्तेदारों से लेकर अन्य तमाम लोग भी संतोष नामदेव को अब लंकेश के नाम से ही जानते हैं।
ऐसे हुई लंकेश नाम से पहचान
हालांकि, इसके पीछे रोचक कहानी भी है। लंकेश के रूप में पहचान बनाने वाले संतोष नामदेव का कहना है कि वह बचपन में रामलीला देखने जाते थे और रामलीला में शुरूआत में सैनिक का किरदार निभाना शुरू किया। इसके बाद एक बार रामलीला में रावण का किरदार निभाने वाला कलाकार गांव में नहीं मिला तो वह रावण का किरदार निभाने तैयार हुआ। उस साल रामलीला में उसने रावण का ऐसा किरदार निभाया कि लोग उसे फिर हर साल रावण की भूमिका में रखने लगे।
रावण के किरदार निभाते-निभाते रावण की भक्ति से संतोष इस कदर प्रभावित हुआ कि उसने रावण की परस्त्रिी हरण की बुराई को नजर अंदाज कर उसकी तमाम अच्छाइयों को अपने जीवन में उतारना शुरू कर दिया। उसके बाद गांव के लोगों ने भी उसे संतोष की बजाय लंकेश कहना शुरू कर दिया। इस तरह संतोष रावण की भक्ति में गहराई तक डूबता चला गया। उसकी पहचान धीरे- धीरे लंकेश के रूप में बढ़ती चली गई।
रावण की मूर्ति पूजा कर मनाता है दशहरा
हालांकि, यह इतना आसान भी नहीं था। शुरूआत में रावण की भक्ति करने पर कई लोगों ने उसका मजाक भी उड़ाया। वह डिगा नहीं और रावण की भक्ति में साल दर साल उसकी आस्था बढ़ती चली गई। रावण पर गहरी आस्था बढ़ने के साथ ही उसने दशहरा के पूर्व रावण की प्रतिमा स्थापना शुरू की और पूरे विधि विधान से उसका पूजन भी शुरू कर दिया। संतोष उर्फ लंकेश की रावण भक्ति को देखकर अब ग्रामीण भी उसका साथ देने लगे हैं। ये सिलसिला अब 49 साल का हो गया है। जब संतोष उर्फ लंकेश के साथ ग्रामीण भी दशहरा पर रावण का पूजन कर धूमधाम से रावण की शोभायात्रा निकालते हैं। ग्रामीणजनों को अब रावण में बुराई नहीं बल्कि रावण की विद्वत्ता और उसका पांडिंत्य एवं ज्ञान नजर आता है।
बेटों का नाम भी रावण के पुत्रों पर
रावण की भक्ति और रावण की अनोखी उपासना की वजह से संतोष नामदेव की अलग पहचान है। अब अपने दोनों बेटों के नाम मेघनाथ और अक्षय रखने के बाद संतोष की विरासत को उसके दोनों बेटे भी बढ़ चढ़कर निभा रहे हैं। मसलन संतोष के जैसे ही उसके दोनों बेटे भी रावण को अपना गुरू और अपनी पहचान मानने लगे हैं। संतोष अपने दोनों बेटों मेघनाथ और अक्षय के साथ मिलकर नवरात्रि की पंचमी के दिन रावण की मूर्ति स्थापित करते हैं और दशहरे पर विसर्जन से पहले शोभायात्रा निकालकर गांव में भ्रमण कर पूरे जोश के साथ उसका विसर्जन करते है।
इसमें पूरे गांव के लोग शामिल होते है। साल 1975 अर्थात 49 सालों से रावण का पूजन करने वाले संतोष पिछले 22 सालों से अपने घर में रावण की मूर्ति स्थापित कर रहे हैं। पहले टेलरिंग की एक दुकान चलाने वाले संतोष उर्फ लंकेश अब पाटन गांव के समृद्ध परिवार में शुमार हो चुके हैं। एक दुकान से शुरू की गई उनकी कारोबारी यात्रा अब कई दुकानों में बढ़ चुकी है और उनकी हर एक दुकान का नाम ‘जय लंकेश’ है।
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