Dadaguru's unimaginable Mahavrat : 1300 दिन से बिना कुछ खाए सिर्फ नर्मदा जल पर जिंदा हैं 'दादा गुरु', अकल्पनीय महाव्रत पर सरकार ने शुरू की रिसर्च
Dadaguru's unimaginable Mahavrat: जबलपुर। भारतवर्ष कई तरह की विस्मय और आश्चर्यचकित करने वाली चीजों से भरा हुआ है। प्राचीन काल से अब तक न जाने कितने रहस्यमयी बातें हमने सुनी और देखीं होंगी। इन्हीं सबमें एक खास तबका योगी, ध्यानियों, तपस्वियों का भी रहा है। आध्यात्मिक जगत ने हमेशा से ही इंसान और विज्ञान न सिर्फ सोचने पर मजबूर किया बल्कि इसके आगे कई बार विज्ञान भी फेल होता नजर आया।
देश में साधुओं और सन्यासियों की कमी नहीं हैं लेकिन कुछ तपस्वी ऐसे भी हैं जिनकी एक झलक पाने को लोग देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी दौड़े चले आते हैं। आज हम आपके लिए जिन सन्यासी के बारे में बताने जा रहे हैं, उन्होंने विज्ञान को भी अचरज में डाल दिया। जबलपुर के 'दादा गुरु' को इन दिनों हर कोई देखना चाहता और उनका आशीर्वाद पाना चाहता है।
कोई इंसान 1300 दिन से भी अधिक समय तक कैसे जिंदा रह सकता है? शायद आपको भी पढ़कर इस बात का अचंभा होगा। लेकिन, हम आपको जबलपुर के एक ऐसे महायोगी से रू-ब-रू करा रहे हैं जिन्होंने 1300 दिनों से न ही भोजन किया और न ही फलाहार। 'दादा गुरू' रोजाना सिर्फ नर्मदा नदी का एक लीटर (Dadaguru's unimaginable Mahavrat) पानी पीते हैं फिर भी वे पूरी तरह से स्वस्थ हैं। महायोगी के इस अविश्वसनीय, अकल्पनीय महाव्रत का रहस्य समझने के लिए अब सरकार ने भी इन पर रिसर्च शुरू कर दी है।
दादा गुरू ने 2020 में शुरू किया था महाव्रत
अगर कोई इंसान भोजन को त्याग दे तो वह ज्यादा दिन तक जिंदा नहीं रह सकता। साइंस को चुनौती देने वाले दादा गुरु बिना आहार जीवित रहने की अकल्पनीय क्षमता रखने वाले महायोगी (Dadaguru's unimaginable Mahavrat) को जबलपुर के लोग दादा गुरु कहकर पुकारते हैं। दादा गुरु ने 17 अक्टूबर 2020 को यह महाव्रत शुरू किया था। तब से वह ना अन्न खाते हैं और ना ही फलाहार करते हैं। चौबीस घंटे में सिर्फ एक बार नर्मदा नदी का एक लीटर पानी ही पीते हैं।
3 साल 7 महीने से निराहार दादागुरू
दादा गुरू 3 साल 7 महीनों से बिना अन्न और बिना फलाहार करने के बावजूद पूरी तरह सेहतमंद हैं। दादा गुरु रोजाना 25 से 40 किलोमीटर नर्मदा नदी की परिक्रमा भी करते हैं। इसके बाद मां नर्मदा का पूजन कर भक्तों के बीच बैठकर अध्यात्मिक चिंतन करते हैं। दादा गुरु ने यह कठोर महाव्रत मां नर्मदा के उत्थान का संकल्प लेकर शुरू किया है। दादा गुरु (Dadaguru's unimaginable Mahavrat) ने राजस्थान फर्स्ट के संवाददाता डॉ. सुरेंद्र कुमार कुशवाह को अपने इस संकल्प के बारे में भी बताया।
अकल्पनीय महाव्रत पर रिसर्च करवा रही सरकार
1300 दिन तक बिना अन्न-फलाहार के जीवित रहना अविश्वनीय ही नहीं बल्कि अकल्पनीय भी है। ऐसे में अब सरकार ने भी दादा गुरु की इस अद्भुत क्षमता पर शोध शुरू करवाया है। इस सिलसिले में कलेक्टर दीपक सक्सेना ने मदन महल स्थित शिमला हिल्स में दादा गुरु से भेंट की। (Dadaguru's unimaginable Mahavrat)
मेडिकल एक्सपर्ट की बनाई गई है टीम
कलेक्टर दीपक सक्सेना के मुताबिक दादा गुरु (Dadaguru's unimaginable Mahavrat) की इच्छा से ही यह शोध शुरू किया गया है। सरकार के निर्देश पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ.नवनीत सक्सेना के नेतृत्व में एक्सपर्ट्स की टीम बनाई गई है। जिसमें जबलपुर एमपीएमएसयू के पूर्व कुलपति डॉ. आर.एस.शर्मा, सहायक प्राध्यापक मेडिसिन डॉ. प्रशांत पुणेकर, सहायक प्राध्यापक पैथोलॉजी डॉ. राजेश महोबिया और कुछ प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं।
महाव्रत का रहस्य जानने शुरू हुआ रिसर्च
दादा गुरु के इस महाव्रत पर एक्सपर्ट्स की टीम ने शोध शुरू कर दिया है। दादा गुरू ने नर्मदा (Dadaguru's unimaginable Mahavrat) नदी के ग्वारीघाट सिद्धघाट पर पूजा कर अपनी रोजाना की 25 किमी की पदयात्रा शुरु की तो एक्सपर्ट टीम भी उनके साथ रही। परिक्रमा के बाद दादा गुरु की पल्स, ब्लड प्रेशर, ईसीजी की जांच की गई। यह टीम 7 दिन 24 घंटे महायोगी के साथ रहेगी। जिससे इस अकल्पनीय, अविश्वनीय महाव्रत के पीछे का रहस्य समझा जा सके।
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