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Gwalior Police Fake Encounter: कालिया जिंदा है! ग्वालियर पुलिस ने कालिया के बेटे का किया एंकाउंटर, सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में परिजन!

Gwalior Police Fake Encounter: ग्वालियर। जिले की पुलिस द्वारा डकैत कालिया उर्फ बृजकिशोर को मुठभेड़ में मारने का दावा किया जा रहा है। जबकि, डकैत के परिजनों का कहना है कि वह तो जेल में बंद है। पुलिस ने जिसे...
09:09 PM Jul 25, 2024 IST | Suyash Sharma

Gwalior Police Fake Encounter: ग्वालियर। जिले की पुलिस द्वारा डकैत कालिया उर्फ बृजकिशोर को मुठभेड़ में मारने का दावा किया जा रहा है। जबकि, डकैत के परिजनों का कहना है कि वह तो जेल में बंद है। पुलिस ने जिसे मारा वह कालिया का बेटा खुशालीराम है। परिवार वाले अब दोषी पुलिस अफसरों पर कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं।

परिजनों द्वारा मामले की जांच सीबीआई या किसी अन्य केंद्रीय जांच एजेंसी से कराने की मांग की जा रही है। हाईकोर्ट की ग्वालियर खण्डपीठ ने देरी से कोर्ट में अपील पेश करने की बात कहते हुए इसे खारिज कर दिया। हालांकि, पुलिस (Gwalior Police Fake Encounter) पर सिंगल बैंच द्वारा लगाए गए जुर्माने की राशि 20 हजार से बढ़ाकर एक लाख रुपए कर दी। अब परिजन इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी मे हैं।

तीन युवकों को ले गई थी पुलिस:

मामला ग्वालियर के डबरा में रहने वाले एक परिवार का है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस परिवार के तीन युवकों को 22 अप्रैल 2005 को कथित रूप से उठाकर ले गई थी। परिजनों का कहना है कि पूछताछ (Gwalior Police Fake Encounter) के बाद दो युवकों को तो पुलिस ने छोड़ दिया लेकिन खुशालीराम नामक युवक को नहीं छोड़ा। परिवार वाले अफसरों के ऑफिस के चक्कर काटते रहे लेकिन खुशालीराम का कोई पता नहीं चला।

5 फरवरी 2007 को समाचार पत्र के माध्यम से पता चला कि पुलिस ने मुठभेड़ में डकैत कालिया उर्फ बृजकिशोर को मार दिया। अखबार में छपी फोटो देखकर खुशालीराम की मां ने उसे पहचान लिया (Gwalior Police Fake Encounter) और कहा कि वह उसके बेटे का शव है। उसने इस मामले में पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने उसका नाम खुशाली उर्फ कालिया लिख दिया।

सीबीआई से जांच की मांग:

इसके बाद खुशालीराम के परिजन हाई कोर्ट की ग्वालियर खण्डपीठ पहुंचे, जहां सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराके रिपोर्ट देने के आदेश दिए। साथ ही पुलिस (Gwalior Police Fake Encounter) पर बीस हजार रुपए की कॉस्ट भी लगाई।

सिंगल बैंच के फैसले के खिलाफ खुशालीराम का परिवार यह कहते हुए डबल बेंच में गया कि मामले की जांच सीआईडी से कराई जा रही है, जो पुलिस का ही एक हिस्सा है। इस मामले में अनेक बड़े पुलिस अफसर जुड़े है इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। इसकी जांच सीबीआई या किसी अन्य निष्पक्ष जांच एजेंसी से करानी चाहिए।

डकैत के जिंदा होने का दावा:

सुनवाई के दौरान एडवोकेट जितेंद शर्मा ने बताया कि एक आरटीआई में मिली जानकारी में यह खुलासा हुआ है कि जिस डकैत का पुलिस द्वारा एनकाउंटर का दावा किया जा रहा है वह जिंदा है और (Gwalior Police Fake Encounter) झांसी की जेल में बंद है। साथ ही सीआईडी की जांच पर भी सवाल उठाए गए कि उसने सिर्फ एक एफआईआर की जांच करने के बाद ही मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी।

इसी आधार पर मृतक के परिजनों ने सीबीआई जांच और मुआवजे की मांग करते हुए हाई कोर्ट की सिंगल बैंच में याचिका दायर की, जो खारिज हो गई। 2011 में सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ अपील पेश की गई। एडवोकेट जितेंद्र शर्मा ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में हुए खुलासे के बाद एएसपी ने मुठभेड़ की जांच की। इसमें यह स्पष्ट हुआ कि डकैत कालिया तो जेल में बंद है।

कोर्ट ने पांच गुना की कॉस्ट की रकम:

एडवोकेट शर्मा ने बताया कि मृतक के परिजनों ने जांच को लेकर आवेदन भी दिया था। हालांकि, पुलिस ने न तो एफआईआर दर्ज की और ना ही मामले की निष्पक्ष जांच की। कोर्ट ने उनका व शासन का पक्ष सुनने के बाद फैसला सुनाया। कोर्ट ने याचिका (Gwalior Police Fake Encounter) को देर से आने का हवाला देते हुए अस्वीकार कर दिया।

साथ ही कॉस्ट की राशि पांच गुना बढ़ा दी। पीड़ित पक्ष के वकील जितेंद शर्मा का कहना है कि उनका पक्षकार इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। परिजनों ने मुठभेड़ में मारे गए निर्दोष के आरोपियों को दंडित करने की बात कही है। अब सुप्रीम कोर्ट में मामले की सीबीआई जांच की मांग के लिए अपील करने की तैयारी परिजनों के द्वारा की जा रही है।

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