Gwalior Ration Scam: राशन की दुकानों से गरीबों के हक पर डांका, करोड़ों की हेराफेरी का अब होगा हिसाब-किताब!
Gwalior Ration Scam: ग्वालियर। याद करिए साल 2020 का समय जब कोरोना काल में हाहाकार मच रहा था। उस दौरान लोग एक-दूसरे के लिए मदद का हाथ आगे बढ़ा रहे थे। वहीं, इस दौरान कुछ ऐसे लोग भी थे जो इस संकट के समय गरीबों के हक पर डाका डालने में जुटे हुए थे। ग्वालियर की एक सैकड़ा सरकारी राशन की दुकानों में बड़ा घोटाला उजागर हुआ। इस संकट की घड़ी में सरकारी राशन की दुकानों ने गरीबों के हक पर डाका डालकर सरकारी राशन में करोड़ों रूपए की हेराफेरी की।
राशन दुकान में घोटाला
जब यह घोटाला उजागर हुआ तो प्रशासन ने इन सभी पर मामला दर्ज कर दिया। हालांकि, 4 साल बीत जाने के बाद खाद्य आपूर्ति विभाग सरकारी राशन की कालाबाजारी के बाद भी 99 दुकानों से फूड विभाग वसूली नहीं कर पाया। अब इनके द्वारा लगभग तीन करोड़ रूपए से भी ज्यादा का खाद्यान्न ठिकाने लगाया गया। अब इसकी प्रदेशभर में चल रही जांच दो सप्ताह में पूरी होगी। ऐसी दुकानों को मिलने वाले कमीशन से वसूली की जाएगी।
गरीबों के हक पर डांका
ग्वालियर जिले की 99 ऐसी राशन की दुकानें हैं, जिनमें यह घोटाला सामने आया है। इन्होंने गरीबों के हक पर डाका डालकर सरकारी राशन में हेराफेरी की। जिला आपूर्ति नियंत्रक विपिन श्रीवास्तव ने कहा कि दुकानों पर खाद्यान्न के स्टॉक का भौतिक सत्यापन पीओएस मशीन से होगा। इससे हर महीने अतिरिक्त आवंटन नही देना पड़ेगा। अब बकाया राशि की वसूली साल 2020 से 2024 के बीच की कीमत के आधार पर हर महीने मिलने वाले कमीशन से की जाएगी।
ऐसा दुकानों का हिसाब-किताब
जिले में जो 99 दुकानों की सूची बनी है उनमें सर्वाधिक 39 डबरा और 37 भितरवार की हैं। मुरार व घाटीगांव में 8-8 तथा शहरी क्षेत्र में कुल 7 दुकानें शामिल हैं। इन दुकानों को फूड विभाग हर माह उनकी मांग के आधार पर अतिरिक्त आवंटन दे रहा है। इससे कई बार अंतिम दिनों में पहुंचने वाले परिवारों को राशन भी नहीं मिल पाता है। 4 साल से चल रही इस दिक्कत को दूर करने के लिए विभाग ने दो सप्ताह पहले आदेश जारी किए।
इसी आधार पर कलेक्टर जिले में टीम गठित कर रहे हैं। विभाग के अनुसार अकेले डबरा में ऐसी दुकानों से 1.26 करोड़ की वसूली होनी है। जबकि जिले में कुल 540 राशन दुकानें हैं, इनमें से 277 शहरी क्षेत्र और 263 ग्रामीण इलाकों में। बहरहाल सरकारी राशन में हेराफेरी करने वाली इन सभी दुकानों पर प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया। जांच पूरी होने के बाद इन सभी दुकानों को मिलने वाले कमीशन से ही लगभग 3 करोड़ से अधिक की वसूली की जाएगी।
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