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Jal Sanchay Abhiyan: जल संचय अभियान की तीन राज्यों के साथ शुरूआत, सूरत में दिग्गज नेताओं का दिखा जमावड़ा

Jal Sanchay Abhiyan: सूरत। प्रधानमंत्री के जल संचय अभियान की शुरूआत सूरत से हो चुकी है। इसका पहल का लक्ष्य गुजरात में करीब 24,800 वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण करना है। इससे उन इलाकों में भी पानी को पहुंचाने...
05:39 PM Oct 13, 2024 IST | MP First

Jal Sanchay Abhiyan: सूरत। प्रधानमंत्री के जल संचय अभियान की शुरूआत सूरत से हो चुकी है। इसका पहल का लक्ष्य गुजरात में करीब 24,800 वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण करना है। इससे उन इलाकों में भी पानी को पहुंचाने का लक्ष्य है, जहां एक-एक बूंद के लिए लोग परेशान होते हैं। सरकार अब पानी को लेकर काफी गंभीर दिखाई दे रही है। यही वजह भी है कि इस अभियान को तीन राज्यों के साथ मिलकर शुरू किया गया है।

दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरूआत

कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्ज्वल कर किया गया। प्रोग्राम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटील एवं गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल का स्वागत किया गया। इस प्रोग्राम में मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव और राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा भी मौजूद हैं, जिनका भव्य स्वागत किया गया। साथ ही बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का भी स्वागत किया गया। इस कार्यक्रम में एक संकल्प पत्र भी दिया गया।

जल संकट पर क्या बोले बिहार उप-मुख्यमंत्री

बिहार के उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में 21 जिले ऐसे हैं, जहां नेपाल से पानी आता है लेकिन हम रोक नहीं सकते। 2008 में जब पहली बार एनडीए की सरकार बनी तब यदि 2 लाख क्यूसेक पानी नेपाल से छोड़ा जाता था, तो पूरे बिहार में बाढ़ का पानी (Jal Sanchay Abhiyan) फैल जाता था। इस बार तकरीबन 6:30 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया तो राज्य सरकार द्वारा और केंद्र सरकार द्वारा इसे व्यवस्थित किया गया। राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात लगातार पानी की किल्लतों को झेलता रहा है।

 

इस अभियान के तहत देश भर में पानी की परेशानी को खत्म किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कर्मभूमि से लेकर जन्म भूमि तक के इस संदेश को खासकर सी आर पाटिल को धन्यवाद देना चाहता हूं। लंबे समय से देश में कई डेम खड़े हैं लेकिन बन नहीं पा रहे थे। नेपाल से बिहार में प्रवेश हो रहे पानी को रोकने के लिए चार-चार डेम दिए, जिसके लिए मैं प्रधानमंत्री और सी आर पाटिल को धन्यवाद देता हूं। सम्राट चौधरी ने कहा कि 'कैच द रेन' के तहत इस कार्यक्रम में मैं पाटिल साहब एवं उनकी पूरी टीम को धन्यवाद देता हूं।

मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने कही बड़ी बात

सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि सीआर पाटिल और राज्य के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने एक अच्छी शुरुआत की है। इसके लिए मैं उन्हें बधाई देता हूं। विधायक इन पुण्य कार्यों में सहभागी बने हैं। सीएम ने कहा कि मैं सूरत के लोगों और इस काम से जुड़े लोगों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। हमारा देश बहुत तरक्की कर रहा है। राजस्थान एक ऐसा राज्य है, जहां जल संसाधनों की अपार संभावनाएं हैं। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करता हूं कि 2003 में पड़ोसी होने के नाते राजस्थान में किसी ने कुछ नहीं कहा लेकिन पानी की व्यवस्था की।

जो अभियान शुरू हुआ है, उसका सबसे बड़ा लाभ राजस्थान को मिलना है। यदि पानी की कमी वाला कोई राज्य है तो वह राजस्थान है। उन्होंने कहा कि इस अभियान को आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी। सीएम ने कहा कि राजस्थानियों में जल संरक्षण की परंपरा और कार्य रहा है। हमारे पूर्वज जल संरक्षण की आवश्यकता को बहुत गहराई से समझते थे। आज आप लोगों ने एक नए आयाम की शुरूआत की। इसे हर क्षेत्र में सबसे बड़ी संभावना यदि कोई है तो वह है पानी। सीएम भजनलाल बोले हर क्षेत्र में सबसे बड़ी संभावना यदि कोई है तो वह पानी है। हमारे पास वहां बहुत बड़ी मात्रा में खनिज हैं।

हमारा राजस्थान बहुत खुशहाल है लेकिन अगर दुर्भाग्य है तो वो पानी का है। दस महीने पहले जब हमारी सरकार आई तो राजस्थान की पीड़ा को महसूस किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन समस्याओं का समाधान (Jal Sanchay Abhiyan) करने का प्रयास किया। इसके लिए हमें यमुना नदी से मिलाने का प्रयास किया गया। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से हमारी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया गया। 2003 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पानी उपलब्ध कराने का बीड़ा उठाया, लेकिन दूसरी ओर घोषणापत्र में कहा गया कि हम यमुना और माही नदी के बीच हुए समझौते को रद्द कर देंगे।

आज देश में पीएम मोदी के नेतृत्व में काफी विकास (Jal Sanchay Abhiyan) हुआ है और आगे बढ़ते जा रहे हैं। विकास की योजना हो या आतंकवाद और नक्सलवाद का खात्मा, देश की जनता आज सब देख रही है। यह योजना भी देश का जन आंदोलन बनेगी। जनभागीदारी भी बनेगी और जल भंडारण भी बनेगा। गुजरात में कई राजस्थानी परिवार हैं। आप लोगों ने अच्छी पहल की है। हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान में यह अभियान काफी आगे तक चलेगा। इस अभियान के माध्यम से राजस्थान के आधे गांवों में काम किया जाएगा। यह नई पहल का पहला कदम है तो चलिए हम दो कदम आगे आगे बढ़ते हैं।

सीएम मोहन यादव बोले यह अद्भुत दृश्य है

सीएम मोहन यादव ने कहा कि सीआर पाटील मैं आपको गंगाजी को लेकर चलाए गए अभियान के लिए बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंन्द्र पटेल मुस्कुराहट और शांतिप्रिय तरीके से काम कैसे किया जाता है, इसका एक आदर्श उदाहरण हैं। बिहार में सिर्फ सम्राट का ही साम्राज्य है लेकिन इसी बीच कुछ भिखारी आ गए और काम गड़बड़ कर दिया। उन्होंने कहा कि कंस को मारकर भगवान कृष्ण ने अपना सबसे बड़ा युद्ध लड़ा था। मैं उस धरती को नमन करता हूं जिससे महात्मा गांधी ने संघर्ष किया।

ये सरदार वल्लभ भाई पटेल की धरती है, जिन्होंने 600 से अधिक रियासतों को एक साथ रखकर वर्तमान मानचित्र बनाया। सरदार पटेल और महात्मा गांधी के काम को आगे बढ़ाने वाला अब तक कोई नहीं मिला। लेकिन, साल 2014 में नरेंद्र मोदी के रूप में इस काम को आगे बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि जल (Jal Sanchay Abhiyan) से ही जीवन है और भारत हर पल बदल रहा है। मध्य प्रदेश नदियों की जननी है।

सी.आर पाटिल ने कहा कि गुजरात मॉडल फिर से दोहराया जाएगा

केंद्रीय जलशक्ति मंत्री ने कहा कि मार्च 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक घोषणा की थी, जब कैच द रेन के इस कार्यक्रम को मजबूत करने की बात आई। जब ये काम शुरू हुआ तो मैं आपको बधाई देता हूं कि जो काम पूरी दुनिया में नहीं हुआ वो आज गुजरात में हो रहा है। जो काम कांग्रेस ने नहीं सोचा वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा हुआ। उन्होंने कहा कि गुजरात में 14,800 बोर बंद जिनको रिचार्ज किया जाए और उसके लिए कोई योजना बनाई जाए और ये कहकर उन्होंने तत्काल योजना बनाई।

आज किसानों के बोर को रिचार्ज करने का 90% खर्च सरकार देती है और इसके लिए मैं गुजरात के मुख्यमंत्री और गुजरात सरकार को धन्यवाद देना चाहता हूं। मंत्री ने कहा कि हमने उद्योगपतियों से मिलकर सिंचाई का काम आसान किया। उद्योगपतियों ने उन्हें आश्वासन दिया कि हम राजस्थान के प्रत्येक गांव में चार बोर बनाएंगे और ये बोर पानी निकालने के लिए नहीं बल्कि जमीन की सिंचाई के लिए हैं।

अलग-अलग राज्यों में पानी पहुंचाने का संकल्प

आज मध्य प्रदेश के लोगों ने भी 2100 गांवों में जमीन के अंदर पानी पहुंचाने के लिए चार बोर बनाने का संकल्प लिया। राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग मातृभूमि को बोर करने की बात कर रहे हैं। देश में जितने बांध बनने थे, उनमें से कुछ बन चुके हैं और कुछ बांध बनने का काम भी चल रहा है। जहां बांध बनते हैं वहां 100 किलोमीटर नहरी पानी उपलब्ध कराना पड़ता है। जब कोई बांध बनता है तो कई किसानों की जमीन चली जाती है और कई गांवों को भी नुकसान होता है। गांवों को अलग-अलग जगहों पर स्थानांतरित भी करना पड़ता है।

एक बांध को बनने में 25 साल लगते हैं और करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल भी यहीं बैठे हैं। मैने उनसे वलसाड और नवसारी की दो नदियों को जोड़ने के लिए भी कहा है। यह काम भी जल्द स्टार्ट हो जाएगा। कलकत्ता के रहने वाले बिहारवासी भी सूरत आये हैं। उन्होंने मुझसे इस बारे में वादा भी किया है। गुजरात के 11,000 गांवों में दो लाख से अधिक वर्षा जल संचयन बोर बनाए जाएंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कभी छोटा नहीं सोचते। जो काम उन्होंने अपने हाथों में लिया है, उसके बारे में कोई सोचेगा भी नहीं। मंत्री ने कहा कि यह काम अकेले सरकार नहीं करेगी बल्कि सभी लोगों के साथ मिलकर किया जाएगा। जनभागीदारी को जनआंदोलन में बदलने का काम सूरत से शुरू हो गया है। गुजरात का यह मॉडल पूरे देश में जाएगा।

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