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Loksabha Election Counting Update गुना-शिवपुरी सीट पर ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी जीत, 5 लाख से ज्यादा मतों से जीत कर बनाया रिकॉर्ड

Loksabha Election Counting Update शिवपुरी। मध्य प्रदेश की गुना लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बड़ी जीत हासिल की  है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुना सीट पर जीत के अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। हालांकि उन्होंने...
07:06 AM Jun 04, 2024 IST | Ranjan Ravi

Loksabha Election Counting Update शिवपुरी। मध्य प्रदेश की गुना लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बड़ी जीत हासिल की  है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुना सीट पर जीत के अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। हालांकि उन्होंने अपना ही रिकार्ड तोड़ा। 2002 के चुनाव में  ज्योतिरादित्य सिंधिया साढ़े चार लाख वोटों से जीते थे। इस बार सिंधिया ने कांग्रेस उम्मीदवार राव यादवेंद्र सिंह यादव को 5 लाख 929 वोटों से हराया।  ज्योतिरादित्य सिंधिया  को कुल 9 लाख 23 हजार 302 वोट  मिले। कांग्रेस के राव यादवेंद्र सिंह यादव को  3 लाख 82 हजार 373 वोट मिला। तीसरे नंबर पर बीएसपी के धनीराम रहे, जिन्हें 30 हजार 235 वोट मिले।

सिंधिया परिवार का गढ़ है गुना-शिवपुरी

मध्यप्रदेश की इस हाईप्रोफाइल लोकसभा सीट को सिंधिया राजपरिवार का गढ़ माना जाता रहा है। कई एजेंसियों के एग्जिट पोल में यह अनुमान लगाया गया है कि भाजपा उम्मीदवार ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी सीट को वापस पाने में सफल हो जाएंगे। बता दें कि इस सीट से राजमाता विजयाराजे सिंधिया कांग्रेस और भाजपा के टिकट पर बारी-बारी से जीतती रही। माधवराव सिंधिया ने भी इस सीट से चुनाव जीते थे। लेकिन 2019 में कांग्रेस के टिकट पर लड़े ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा  प्रत्याशी डॉ. कृष्णपाल यादव ने 1 लाख 25 हजार 549 वोटों से हरा दिया था। 14 बार लगातार अजेय रहने वाले सिंधिया राजपरिवार के किसी प्रत्याशी की गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र में यह पहली हार थी।

एक नजर ज्योतिरादित्य सिंधिया के राजनीतिक सफर पर 

देश के नागरिक उड्डयन मंत्री के रूप में कार्यरत रहे एमपी भाजपा के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना-शिवपुरी सीट से भारी मतों से चुनाव जीत गए हैं। ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया मध्य प्रदेश ही नहीं देश की राजनीति में अपनी खास धमक रखते हैं। सिंधिया देश के नागरिक उड्डयन मंत्री के रूप में कार्यरत थे। वह मध्य प्रदेश राज्य से राज्य सभा में संसद सदस्य चुने गए थे। ग्वालियर राज परिवार से ताल्लुक रखने वाले ज्योतिरादित्य के पिता माधवराव सिंधिया भी कांग्रेस के कद्दावर नेथा थे। हालांकि इसके पहले वे जनसंघ के नेता थे। ज्योतिरादित्य की दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया भाजपा की संस्थापक सदस्यों में से एक थीं।

सिंधिया ने प्राप्त की है उच्च है शिक्षा

ज्योतिरादित्य सिंधिया का जन्म 1 जनवरी 1971 को मुंबई में हुआ था ये माधवराव सिंधिया और माधवी राजे सिंधिया के बेटे हैं। उनकी शिक्षा कैंपियन स्कूल, मुंबई और दून स्कूल, देहरादून में हुई है।  सिंधिया ने सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली  में अपना नामांकन कराया लेकिन कोर्स पूरा नहीं किया। बाद में, उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के लिबरल आर्ट्स कॉलेज से 1993 में अर्थशास्त्र में बीए की डिग्री के साथ स्नातक किया। 2001 में, उन्होंने स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस  से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन किया। ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर रियासत के अंतिम महाराजा जीवाजीराव सिंधिया  के पोते हैं। उनके पिता माधवराव सिंधिया एक भारतीय राजनीतिज्ञ और राजीव गांधी की सरकार में मंत्री थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया से शादी की है।

पिता की मौत के बाद राजनीति में प्रवेश

30 सितंबर 2001 को, उत्तर प्रदेश में एक हवाई जहाज दुर्घटना में सिंधिया के पिता और तत्कालीन सांसद माधवराव सिंधिया की मृत्यु के कारण गुना निर्वाचन क्षेत्र खाली हो गया । तभी से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राजनीति मे कदम रखी । 18 दिसंबर को, ज्योतिरादित्य औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल हो गए। ज्योतिरादित्य सिंधिया पांच बार से संसद सदस्य रहे हैं।

इसमें उनके लोकसभा में चार कार्यकाल (2002-04, 2004-09, 2009-14 और 2014-19) शामिल हैं। सिंधिया ने 2002 में जनसेवा शुरू की। 2008 में उन्होंने दूरसंचार, डाक और आईटी राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। 2009 में वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री के रूप में और फिर 2012 में विद्युत मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में कार्य किया। सिंधिया 2019 में गुना सीट पर कृष्ण पाल सिंह यादव से हार गए थे।

 

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