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क्या कोरोना काल में अनाथ हुए 9041 बच्चों को 9 महीने से नहीं मिली पेंशन, जानिए क्या है सच्चाई और क्यों हो रही राजनीति?

MP Children orphaned भोपाल: मध्य प्रदेश में कोरोना काल में अनाथ हुए 9041 बच्चों को 9 महीने से पेंशन नहीं मिली है। इसको लेकर प्रदेश में राजनीति तेज हो गई है। कोरोना में माता-पिता दोनों को खोने वाले 1041 बच्चों...
04:02 PM Sep 26, 2024 IST | Saraswati Chander

MP Children orphaned भोपाल: मध्य प्रदेश में कोरोना काल में अनाथ हुए 9041 बच्चों को 9 महीने से पेंशन नहीं मिली है। इसको लेकर प्रदेश में राजनीति तेज हो गई है। कोरोना में माता-पिता दोनों को खोने वाले 1041 बच्चों और माता या पिता में से किसी एक को खोने वाले 8000 बच्चों के लिए सरकार ने 2 योजनाएं (स्पॉन्सरशिप स्कीम और मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना) शुरू की थीं। इन योजनाओं के तहत बच्चों को हर महीने 4000 की आर्थिक मदद दी जाती थी, लेकिन जनवरी से यह सरकारी पेंशन बंद हो गई है।

अनाथ बच्चों को पेंशन देने की मांग

वहीं, 9 महीने से अनाथ बच्चों को पेंशन नहीं मिलने पर कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बरौलिया, ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर निशाना साधते हुए कहा है, "अनाथ बच्चों की पेंशन रोकना (Children orphaned during Corona period in MP ) यह दर्शाता है कि मुख्यमंत्री कितने संवेदनशील है उन्हें तत्काल इस और ध्यान देना चाहिए और अनाथ बच्चों को मिलने वाली पेंशन शुरू करना चाहिए।"

कोरोना में अनाथ बच्चों की पेंशन रोके जाने पर महासंग्राम

बता दें कि, शिवराज सरकार ने कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों के लिए तमाम सुविधाओं के साथ इन्हें पेंशन भी देने का ऐलान किया गया था। ऐसे में बच्चों को पेंशन नहीं मिलने से सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कोरोना काल में माता-पिता दोनों या इनमें से किसी एक को खोने वाले बच्चों को मिलने वाली सरकारी पेंशन बंद हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में ऐसे 9,041 बच्चे हैं। 1 मार्च 2020 से जून 2021 तक प्रदेश के 1,041 बच्चों ने माता-पिता दोनों को खो दिया।

8000 बच्चों के माता या फिर पिता की मौत

बता दें कि इस सूची में प्रदेश में 8000 बच्चे ऐसे हैं, जिनके माता-पिता में से किसी एक की जान कोरोना काल में चली गई थी। ऐसे में पिछले 9 माह से पेंशन बंद होने से ये बच्चे फिर से बेसहारा हो गए हैं। इसको लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर जमकर निशाना साधा है।

क्या सच में कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों की पेंशन बंद हो गई है?

पीसीसी चीफ ने कहा, " बच्चों के लालन-पालन में कोई परेशानी (Jitu Patwari on orphaned Children ) न हो, इसके लिए सरकार ने दो योजनाएं शुरू की थीं। एक का नाम था- स्पॉन्सरशिप स्कीम और दूसरी- मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना। दोनों ही योजनाओं के तहत बच्चों को हर माह 4 हजार रुपए पेंशन दी जा रही थी,लेकिन इस साल जनवरी से यह राशि नहीं मिल रही है। अधिकारी कह रहे हैं केंद्र की मदद बंद हो गई है। आप बताइए, सच्चाई क्या है? कर्ज लेने की आदी हो चुकी सरकार क्या बेसहारा बच्चों की मदद नहीं कर सकती?"

जीतू पटवारी पर बीजेपी का पलटवार

वहीं, इस पूरे मामले में बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने जीतू पटवारी को नसीहत देते हुए कहा कि वे इस मामले पर झूठ बोल रहे हैं। बीजेपी प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने कहा है, "झूठे जीतू पटवारी जी, मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार द्वारा कोविड-19 के दौरान अनाथ हुए बच्चों को आर्थिक एवं खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना (Politics on Children orphaned Pension) शुरू की गई थी ताकि वह गरिमा पूर्ण जीवन निर्वाह करते हुए अपनी शिक्षा जारी रख सकें।"

जीतू पटवारी पर बरसे बीजेपी प्रवक्ता

BJP प्रवक्ता ने कहा, "आप अपना अधूरा ज्ञान सुधार लें। इस योजना के तहत प्रत्येक हितग्राही को रुपए 4000 रुपए  नहीं बल्कि 5000 रुपए प्रति माह की आर्थिक सहायता प्रदान करने का प्रावधान है। हितग्राही बच्चों की संख्या 8000 नहीं बल्कि 1225 है। अप्रैल 2024 से जून 2024 तक की आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए कुल राशि 1.84 करोड़ का बजट 10 जुलाई 24 को ही जारी किया जा चुका है। जल्द ही सितंबर 2024 तक की राशि का भुगतान भी बच्चों को प्राप्त हो जाएगा"

जीतू पटवारी को भ्रम न फैलाने की नसीहत

बीजेपी प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने पीसीसी चीफ जीतू पटवारी को नसीहत देते हुए कहा, "आप झूठ न फैलाएं , भ्रम न फैलाएं। यह योजना न बंद  हुई है और ना कभी बंद होगी। आपने इसी प्रकार लाडली बहना योजना, 450 रुपए में बहनों को सिलेंडर देने की योजना को लेकर भी जमकर झूठ फैलाया था, उसकी सच्चाई भी प्रदेश की बहनों ने देख ली है। कोई भी योजना बंद नहीं हुई है। बेहतर हो झूठ बोलने की बजाय, सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएं।"

कमलनाथ ने सरकार से की ये मांग

वहीं, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इस पूरे मामले में प्रदेश की मोहन सरकार पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा है, "कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों को आसरा और हर संभव मदद देना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है, लेकिन मध्यप्रदेश सरकार ने अमानवीयता और असंवेदनशीलता की सारी हदें पार करते हुए मासूमों से निवाला तक छीन लिया है। मैं सरकार से मांग करता हूं कि कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों के साथ मानवीय दृष्टिकोण रखते हुए उनकी पेंशन तत्काल बहाल करें और जनवरी से सितंबर तक की लंबित पेंशन राशि का भी भुगतान कर मासूमों का सहारा बनें।"

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