Parisiman Aayog: एमपी में बदलेगा जिलों का नक्शा, कांग्रेस ने जताया विरोध
Parisiman Aayog: भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ी घोषणा करते हुए परिसीमन आयोग बनाने की घोषणा की है। तीन सदस्यों वाले इस आयोग का जिम्मा रिटायर सीनियर आईएएस ऑफिसर मनोज श्रीवास्तव को दिया गया है। सीएम के इस महत्वपूर्ण फैसले के तहत राज्य सरकार अब प्रदेश के भीतर जिलों का नक्शा बदलने वाली है। सरकार ने सभी संभागों, जिलों और तहसीलों की सीमाओं (Parisiman Aayog) को नए सिरे से निर्धारित करने के निर्देश भी दे दिए हैं।
परिसीमन आयोग के गठन के पीछे सीएम ने बताई अपनी यह मंशा
आयोग का गठन होने तथा जरूरी कार्यवाही पूरी होने के बाद मप्र में जल्द ही नये जिलों, कस्बों, और तहसीलों का सीमांकन भी शुरू हो जायेगा। इसके पीछे जिलों को भौगोलिक दृष्टि से सरल बनाना है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने परिसीमन आयोग का एलान करते हुए कहा कि “जब हमने सरकार बनाई तो इस बात पर ध्यान दिया कि भौगोलिक दृष्टि से भारत का दूसरा सबसे बड़ा राज्य होने के नाते मध्य प्रदेश का अपना क्षेत्रफल तो है लेकिन समय के साथ इसमें कुछ कठिनाइयां भी आई हैं। जिले तो बढ़ गए, लेकिन जिलों की अपनी सीमाएं हैं। कई विसंगतियां हैं, कई संभाग बहुत छोटे हो गए हैं। ऐसी कई विसंगतियों के लिए हमने नया परिसीमन आयोग बनाया है।”
#MadhyaPradesh :- प्रदेश सरकार ने बनाया परिसीमन आयोग
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— MP First (@MPfirstofficial) September 9, 2024
1 नवंबर 1956 को हुआ था मध्य प्रदेश राज्य का गठन
वर्ष 1947 में देश को आजादी मिलने के नौ साल बाद एक नवंबर 1956 को मप्र का गठन हुआ था। उस वक्त एमपी में सिर्फ 43 जिले ही थे लेकिन जनसंख्या के लगातार बढ़ने से धीर-धीरे नये जिले भी बनते गए। वर्ष 2023 में हुए विधानसभा चुनाव के ठीक पहले सरकार ने 3 नये जिले बनाए, जिसमें सतना से मैहर, छिंदवाड़ा से पांढुर्णा और रीवा से मऊगंज को अलग कर नए जिले बनाए गए थे।
राज्य में अब जिलों की संख्या 55 हो गई है और यही वजह है कि आनन-फानन में बनाए गए जिलों से जनता को मुख्यालय तक पहुंचकर अपने सरकारी काम कराने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने जिलों की सीमाओं को नए सिरे से तय करने का फैसला लिया है। परिसीमन को लेकर सरकार की मंशा तो अच्छी है लेकिन सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस को शक है। मप्र कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि परिसीमन भोगोलिक और संख्यात्मक होना चाहिए न कि सियासी, परिसीमन में राजनीतिक दुर्भावना हुई तो यह जनता से अन्याय होगा और कांग्रेस इसका विरोध करेगी।
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