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Burhanpur Migration News: दो जून की रोटी के लिए गांव से हो रहे पलायन, ग्राम पंचायत के पास नहीं कोई रिकॉर्ड

Burhanpur Migration News: आदिवासी बहुल धूलकोट क्षेत्र में मौजूद पलायन की समस्या का समाधान नहीं हो पाया। कई गांव पलायन से वीरान दिखने लगे।
04:29 PM Dec 07, 2024 IST | MP First

Burhanpur Migration News: बुरहानपुर। लोग अक्सर कमाई करने के लिए अपने घर को छोड़कर दूसरे शहर चले जाते हैं। गांव का भोला भाला आदमी अपनी मिट्टी, घर और खेत-खलिहान को सिर्फ इसलिए छोड़ रहा है क्योंकि वहां पर उसके पास आय का कोई साधन नहीं है। शहर में लोग धूल और कंक्रीट भरी जगहों पर जाकर खुद को कुछ दिन तो रोकता लेकिन फिर उसे अपने घर और गांव की याद सताने लगती है। हालांकि, वापस लौटने के लिए उसके पास कोई चारा नहीं बचता। आइए जानते हैं ऐसे ही एक गांव की तस्वीर को जहां से हर साल सैकड़ों लोग पलायन करते हैं।

दो जून की रोटी के लिए पलायन

जिले के आदिवासी बहुल धूलकोट क्षेत्र में मौजूद पलायन की बड़ी समस्या का अब तक कोई हल नहीं निकल पाया है। कई गांव पलायन के चलते वीरान नजर आने लगे हैं। इस क्षेत्र में रोजगार के पर्याप्त साधन नहीं हैं। गांव में बेरोजगारी पनप रही है। इसके कारण आदिवासी परिवार दूसरे राज्यों में पलायन करने के लिए विवश होते हैं। पूर्व में जिला प्रशासन ने ऐसे मजदूरों का रिकार्ड संधारित करने के निर्देश ग्राम पंचायत को दिए थे लेकिन इसका पालन भी नहीं किया जा रहा है। इसके कारण यह तय नहीं हो पता कि वास्तव में कितने मजदूर पलायन करके दूसरे राज्यों में रोजगार की तलाश में जा चुके हैं।

कई गांव हो चुके खाली

यही वजह है कि उनके बंधक बनाए जाने की सूचना भी प्रशासन को देरी से मिलती है। अब तक एक दर्जन गांव से करीब 400 परिवारों के पलायन की सूचना है। अधिकांश गांव खाली हो चुके है। घरों की रखवाली के लिए बुजुर्गों को रखा गया है। यह बुजुर्ग पूरे दिन घरों सहित मवेशियों की देखभाल करते हैं लेकिन जिला प्रशासन का उदासीन रवैये से वो भी परेशान हैं। धुलकोट तहसीलदार ने इस मामले में कुछ भी कहने से साफ इनकार कर दिया।

ना ठीक से पोषण ना कोई सुविधा

बता दें कि धुलकोट क्षेत्र के पिपराना, अंबा, बोरी बुजुर्ग, दवाटिया, धौंड, कमलखेड़ा सहित अन्य गांवों के ग्रामीणों ने पलायन का रुख अपनाया है। यह मजदूर छोटे-छोटे बच्चों सहित महिलाओं को लेकर दूसरे राज्यों का रुख अपना रहे हैं। गांव में अधिकांश ग्रामीणों के पास नाममात्र की खेती है। इससे उनका भरण पोषण ठीक से नहीं हो पाता। पूरे साल में एकाध बार अच्छी फसल होती है।

बाकी सीजन ठप्प रहता है। गांव में पंचायत स्तर भी कोई रोजगार नहीं मिल रहा है। इसके अलावा क्षेत्र में कोई दूसरा बड़ा उद्योग नहीं है। यही वजह है कि ग्रामीण मजदूर हैदराबाद, महाराष्ट्र, गुजरात सहित अन्य राज्यों में काम की तलाश में पहुंच रहे हैं। रोजाना धुलकोट बस स्टैंड से दर्जनों बस व पिकअप से मजदूर रोजगार के लिए पलायन करने को मजबूर हैं।

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