Shivpuri News: लाडो के जन्म पर जश्न में डूबा परिवार, घर लिवाने के लिए डीजे के साथ अस्पताल पहुंचा परिवार
Shivpuri News: शिवपुरी। आमतौर पर भारतीय घरों में बेटियों के जन्म को इतना सुखद नहीं माना जाता जितना बेटों के जन्म को। परन्तु धीरे-धीरे यह परंपरा बदल रही है। ऐसा ही एक उदाहरण मध्य प्रदेश के शिवपुरी में देखने को मिला जब घर में लाडो के जन्म पर एक परिवार जश्न में डूब गया। अपनी लाडो को अस्पताल से लाने के लिए परिजन डीजे के साथ कार को सजाकर पहुंचे। यहां से गांव तक के रास्ते में डीजे आगे चल रहा था और कार उसको पीछे चल रही थी।
इस दौरान रास्ते में भी रिश्तेदारों ने भी बिटिया का स्वागत कर लाडो को अपना आर्शीवाद दिया और डीजे पर बजते गानों पर थिरके। घर पहुंचने पर भी जश्न का माहौल रहा, यहां लाडो के पहली बार गृह प्रवेश करने पर आतिशबाजी कराई गई, साथ ही लाडो के छोटे-छोटे पैरों के पदचिह्न भी घर की देहरी पर छापे गए।
पहली संतान बेटी होने पर जश्न में डूबा परिवार
अब तक मिली जानकारी (Shivpuri News) के अनुसार करैरा तहसील के कूंड़ गांव के रहने वाले ऐवरन यादव की शादी 16 माह पहले नेहा के साथ हुई थी। इसके बाद नेहा गर्भवती हुई और 4 अक्टूबर को नेहा को प्रसव के लिए दिनारा के स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। यहां नेहा ने 4 अक्टूबर को एक बेटी को जन्म दिया था। बेटी के पैदा होने पर परिवार ने खुशियां मनाई थी। परिवार ने बेटी को अस्पताल से छुट्टी दिलाने के बाद जश्न मनाने की पूरी तैयारी कर ली थी।
अस्पताल से गांव तक जश्न में डूबा रहा परिवार
शनिवार की शाम नेहा और उसकी नवजात बेटी को दिनारा अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। यहां बेटी को लेने के लिए परिवार डीजे के साथ कार को सजाकर पहुंचा था। बता दें कई किलोमीटर दूर गांव तक कार के साथ डीजे को ले जाया गया। इस दौरान रास्ते में रिश्तेदारों ने भी बेटी को आशीर्वाद दिया, साथ ही डीजे पर थिरकते नजर आए। बेटी जब घर पहुंची तो उसका आतिशबाजी के साथ स्वागत किया गया। इस दौरान घर पर परिवार के सदस्यों ने खुशी मनाते हुए डीजे पर जमकर डांस किया। बेटी के पहली बार गृह प्रवेश पर परिवार ने बेटी के पैर लाल रंग में डुबोकर घर की देहरी सहित वाहनों पर छपवाएं। इस दौरान परिवार की खुशी में शामिल होने रिश्तेदार सहित गांव वाले भी मौजूद रहे थे।
एमपी में बेटियां अभिशाप नहीं
एक जमाने में बेटियों के पैदा होने पर अभिशाप माना जाता था। बेटी के पैदा होने के बाद मां के सम्मान को घटा दिया जाता था। देश और प्रदेश में भी कई घटनाएं (Shivpuri News) ऐसी भी सामने आई, जहां बेटियों को जन्म से पहले ही मां की कोख में मरवा दिया गया। तो वहीं कई बेटियों को जिंदा खुले में फेंक दिया गया। लेकिन पिछले कई वर्षों से सरकार इन कुरीतियों को खत्म करने के प्रयास में जुटी हुई है।
आज सरकारें लाड़ली लक्ष्मी योजना से लेकर लाड़ली बहना योजना तक चला रही है। साथ ही बेटियां पढ़ सके, इसके लिए निशुल्क शिक्षा और शिक्षा व्यवस्था के जरिये उन्हें प्रोत्साहित करते हुए लैपटॉप और स्कूटी देने का काम कर रही है। यही वजह है कि आज बेटियों को अभिशाप मानने वाली कुरीति लगभग दम तोड़ चुकी है। आज बेटे के जन्म से ज्यादा बेटी के जन्म पर उत्सव मनाया जाता है।
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