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State Lable Compition: राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल बच्चों को नहीं मिली ड्रेस

State Lable Compition: नर्मदापुरम। जिले में इन दिनों 5 दिवसीय 68 वीं राज्य स्तरीय बैडमिंटन और शतरंज प्रतियोगिता चल रही है। इसमें प्रदेश के 10 संभाग से करीब 500 स्कूली बच्चे प्रतिभागी बन कर शामिल हुए हैं। इस प्रतियोगिता में...
05:45 PM Oct 17, 2024 IST | MP First

State Lable Compition: नर्मदापुरम। जिले में इन दिनों 5 दिवसीय 68 वीं राज्य स्तरीय बैडमिंटन और शतरंज प्रतियोगिता चल रही है। इसमें प्रदेश के 10 संभाग से करीब 500 स्कूली बच्चे प्रतिभागी बन कर शामिल हुए हैं। इस प्रतियोगिता में बड़ी बात यह है कि दोनों खेलों में खिलाडी बच्चों को अब तक खेल किट नहीं दिया गया, जिसके चलते बच्चे अपने-अपने कपड़ों में मैच खेलते नजर आ रहे हैं।

जबकि, कोई भी खेल प्रतियोगिता में खिलाड़ी बच्चों को शासन स्तर से ड्रेस किट दी जाती है। इसे पहनकर बच्चे प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हैं लेकिन आयोजित इस राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में ऐसा कुछ नहीं दिखाई दे रहा। जो बच्चे मैच खेल रहे हैं, वह अलग-अलग रंग-बिरंगी कपड़ों में खेलते नजर आ रहे हैं।

नहीं मिली ड्रेस

खेलों को बढ़ावा दिए जाने और खेलों में सुविधाएं दिए जाने को लेकर राज्य सरकार कई प्रकार से दावे करती है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। जिन खिलाड़ी बच्चों को प्रदेश स्तर के लिए चयनित किया जाना है, उन्हें आयोजित राज्य स्तरीय बैडमिंटन और शतरंज प्रतियोगिता में खेल किट (ड्रेस ) नहीं दी गई है। इसके चलते बच्चे अपनी ड्रेस में ही खेलते दिखाई दे रहे हैं।

दरअसल, लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई ) की लापरवाही के चलते खिलाड़ी बिना किट के मैच खेलने को मजबूर हैं। बताया जा रहा है कि डीपीआई ने जिला शिक्षा अधिकारी और संयुक्त संचालक लोक शिक्षण से खिलाडियों को किट दिए जाने के अधिकार छीन लिए हैं। अब तक यहां पहुंची टीम को किट भी नहीं दिए गए। इस वजह से हालात यह बन गए हैं कि बच्चे बिना किट के मैच खेल रहे हैं। अधिकांश टीमों के चार-चार मैच हो चुके हैं और उनका टूर्नामेंट ख़त्म होने को है पर किट उन्हें नहीं मिल पाई।

खिलाड़ियों में छाई मायूसी

जब इस बारे में खिलाड़ियों से बात की गई तो किट ना मिलने की वजह से उनमें मायूसी छाई रही। उनका कहना है कि जब खिलाड़ियों को सुविधाएं ही नहीं मिलेंगी तो परिमाण अच्छा कैसे मिलेगा? प्रतियोगिता की कॉडिनेटर भी इस बात को मानती हैं कि किट ना मिलने की वजह से बच्चों में निराशा है। खेलों में दी जाने वाली सुविधाओं का इस प्रतियोगिता से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश के खिलाड़ी केवल अपने प्रतिद्वंदी खिलाडी से ही नहीं जूझते बल्कि पहले उन्हें ख़राब परिस्थियों से भी जूझना पड़ता है।

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