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Tikamgarh Untouchability News: आज भी इस गांव में छुआछूत और जात-पात का जहर है बरकरार, पानी के लिए जात के हिसाब से बंटे हैं कुएं

Tikamgarh Untouchability News: टीकमगढ। बुंदेलखंड के टीकमगढ जिले में आज के इस डिजिटल युग में भी लोगों में जातियों का जगह भरा हुआ है।
07:22 PM Oct 27, 2024 IST | Shivanchal Goswami

Tikamgarh Untouchability News: टीकमगढ। बुंदेलखंड के टीकमगढ जिले में आज के इस डिजिटल युग में भी लोगों में जातियों का जगह भरा हुआ है। यहां जात-पात को लेकर भेदभाव आज भी जारी है। जाति के हिसाब से लोग अलग-अलग कुंओं से पानी भरते हैं। लोगों का कहना है कि यह हमारे गांव की सैकड़ों सालों से चली आ रही मर्यादा है। जिसका सभी समाज के लोग पालन करते आ रहे हैं। यह राजशाही समय से चली आ रही है और इस गांव में यह तीन कुएं उसी समय बनवाए गए थे। अभी तो सिर्फ उनका जीर्णोध्दार किया गया था।

गांव में जात-पात चरम पर है

टीकमगढ जिले के बलदेवगढ़ ब्लॉक का सुजानपुरा गांव हमेशा सुर्खियों में रहता है। वैसे इस गांव को तीन कुंओं वाले गांव के नाम से जाना जाता है। इस गांव के यह तीन कुएं अनूठे हैं। इस गांव की आबादी की यदि हम बात करें तो इसकी आबादी 4,500 के करीब है। इसमें सभी समाज के लोग निवास करते हैं। इसमें पंडित, यादव, अहिरवार, राय, वंशकार, नाई ओर कुशवाहा समजा के लोगों के अलावा अन्य समाज भी निवास रहते हैं। मगर इस गांव में बने यह तीन कुएं एक अजूबा बने हुए हैं। इसमें एक कुएं से पंडित, यादव, राय, कुशवाहा समाज के लोग पानी भरते है। दूसरे कुएं से सिर्फ अहिरवार ( दलित) समाज के लोग पानी भरते ओर तीसरे कुएं से सिर्फ वंशकार जाती के लोग पानी भरते हैं।

समाज के हिसाब से कुएं बंटे हुए हैं

अलग-अलग समाज के लोग एक दूसरे के कुएं से कभी भी पानी नहीं भरते हैं। जब इसकी वजह लोगों से जानी तो उनका कहना रहा कि हमारे गांव में राजशाही समय से लोगों के सम्मान में यह मर्यादा बनी हुई है। सुजानपुरा ग्राम पंचायत के सरपंच उमराव ने बताया कि हमारे गांव में अहिरवार समाज का अलग कुआं है, जिससे सिर्फ हमारे समाज के लोग ही पानी भर सकते हैं। दूसरा कुआं जो मंदिर के पास बना उससे पण्डित, यादव, राय, नाई जाति के लोग पानी भरते हैं। तीसरे कुएं से वंशकार जाति के लोग पानी भरते हैं। उनका कहना रहा कि हमारे गांव की यह मर्यादा है। इसके चलते किसी दूसरी समाज के कुंओं से दूसरी समाज के लोग पानी नहीं भर सकते।

क्या प्रशासन ने नहीं उठाया ठोस कदम?

आज के 21वीं सदी में इस प्रकार की जाति-पाति में भेदभाव गले नहीं उतरती है। एक तरफ तो हमारा देश ओर समाज अंतरिक्ष में भी तिरंगा फहरा रहा है। वहीं, दूसरी ओर इस तरह का सीन देखकर किसी भी इंसान को सोचने पर मजबूर कर देगा। इसमें कहीं न कहीं सरकारी सिस्टम में कोई न कोई कमी जरूर होगी। इसके चलते इस गांव में ऐसे हालात बने हुए हैं। इस मामले को लेकर जिले के आला-अधिकारी कैमरे के सामने नहीं आ रहे हैं। गांव के लोग इस छुआछूत को मर्यादा कहकर लोगों से भेदभाव करने में लगे हैं और कुछ न कुछ छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।

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