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One Nation One Election: मोदी सरकार ने 'वन नेशन वन इलेक्शन' प्रस्ताव को दी मंजूरी, जानिए इसके बारे में सब कुछ

One Nation One Election: मोदी सरकार ने आज अपना एक और वादा पूरा करते हुए 'वन नेशन वन इलेक्शन' के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब पूरे देश में सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव एक साथ...
08:28 PM Sep 18, 2024 IST | MP First

One Nation One Election: मोदी सरकार ने आज अपना एक और वादा पूरा करते हुए 'वन नेशन वन इलेक्शन' के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब पूरे देश में सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव एक साथ कराए जाएंगे। इस संबंध में सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में बिल पेश करेगी। नए One Nation One Election बिल के तहत न केवल विधानसभा और लोकसभा चुनाव बल्कि सभी स्थानीय चुनाव जैसे नगर पालिका, ग्राम पंचायत आदि भी एक साथ ही करवाए जाएंगे।

क्या है 'वन नेशन-वन इलेक्शन'

भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लंबे समय से देश में एक राष्ट्र एक चुनाव की पैरवी करते रहे हैं। ऐसा करने के पीछे वह कारण बताते हैं कि चुनाव सिर्फ तीन या चार महीने के लिए होना चाहिए, बाकी पूरे पांच साल तक राजनीति के बजाय काम होना चाहिए। इससे चुनाव पर होने वाला खर्चा कम होगा और प्रशासन भी पूरी दक्षता के साथ अपनी अन्य जिम्मेदारियां निभा पाएगा।

इस संबंध में मोदी सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी जिसमें इसी वर्ष मार्च में अपनी सिफारिशें दी थी। बाद में सरकार ने इस सिफारिश को मंजूरी दे दी। वर्तमान में पूरे साल तक देश में कहीं न कहीं, कोई न कोई चुनाव चलता ही रहता है जिसके सीआरपीएफ फोर्सेज, प्रशासनिक अमला और सरकारी कर्मचारी, अधिकारी बिजी रहते हैं। वन नेशन वन इलेक्शन लागू होने से यह पूरी कवायद बचेगी।

आजादी के बाद हो चुके हैं एक साथ चुनाव

आपको बता दें कि सन 1947 में भारत के आजाद होने के बाद से सव 1967 तक पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाते थे। परन्तु बाद में राज्यों के पुनर्गठन और अलग-अलग कारणों से देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग चुनाव होने लगे। अभी जहां भाजपा इस प्रस्ताव के पूरी तरह से पक्ष में है वहीं अन्य प्रमुख विपक्षी दल और क्षेत्रीय दल पक्ष में हैं।

'One Nation One Election' बिल लागू करने में चुनौती

हालांकि अभी इस नियम में कुछ पेचीदा बातें हैं, जिन्हें हल करना जरूरी है जैसे किसी दल को बहुमत न मिले तो क्या होगा? इसके अलावा क्षेत्रीय दलों के लिए चुनौती खड़ी होगी। राष्ट्रीय मुद्दों के सामने क्षेत्रीय मुद्दे दब जाएंगे और ऐसे में हो सकता है कि छोटे दल या क्षेत्रीय दल पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे। सबसे बड़ी बात, इस बिल को लागू करने में सबसे पहले तो संविधान संशोधन करना होगा। इसके बाद इस बिल को राज्य विधानसभाओं से भी पास करवाना होगा जो वर्तमान में थोड़ा कठिन लग रहा है। एक साथ इलेक्शन करवाने के लिए बहुत ज्यादा ईवीएम और वीवीपैट मशीन चाहिए होंगी। इसके अलावा एक साथ चुनाव कराने के लिए ज्यादा सुरक्षाबल और प्रशासनिक अमले की जरूरत होगी जो अपने आप में एक चुनौती होगा।

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