Ramakant Bhargava: बुधनी विधानसभा में कैंडिडेट को लेकर एक बार फिर साबित हुआ कि शिवराज सिंह के बिना उनकी विधानसभा में पत्ता भी नहीं हिलता

Ramakant Bhargava: भोपाल। बुधनी विधानसभा उपचुनाव में भाजपा कैंडिडेट को लेकर एक बार फिर साबित हो गया है कि शिवराज सिंह की मर्जी के बिना उनकी विधानसभा में पत्ता भी नहीं हिलता। भले ही शिवराज सिंह ने दिल्ली का दामन...
ramakant bhargava  बुधनी विधानसभा में कैंडिडेट को लेकर एक बार फिर साबित हुआ कि शिवराज सिंह के बिना उनकी विधानसभा में पत्ता भी नहीं हिलता

Ramakant Bhargava: भोपाल। बुधनी विधानसभा उपचुनाव में भाजपा कैंडिडेट को लेकर एक बार फिर साबित हो गया है कि शिवराज सिंह की मर्जी के बिना उनकी विधानसभा में पत्ता भी नहीं हिलता। भले ही शिवराज सिंह ने दिल्ली का दामन थाम लिया हो लेकिन जब उनके क्षेत्र में विधायक के टिकट का सवाल हो तो मर्जी उनकी ही चलेगी। इस बार भी उनके करीबी और बेहद खास रमाकांत भार्गव को ही टिकट दिया गया है। संगठन की राय कुछ अन्य कैंडिडेट पर विचार करने की थी लेकिन शिवराज ने रमाकांत के नाम पर मुहर लगा दी।

कौन हैं रमाकांत भार्गव

रमाकांत भार्गव को विदिशा संसदीय क्षेत्र से शिवराज ने सांसद बका टिकट दिलाया और अब जब उनके बुधनी विधानसभा क्षेत्र की बारी आई तो भी उन्होंने अपने खास रमाकांत (Ramakant Bhargava) को ही टिकट दिलाया। बीजेपी का उम्र का क्राइटेरिया भी शिवराज की पसंद के आगे फेल हो गया, रमाकांत भार्गव 71 साल के हो चुके हैं। बीजेपी हाईकमान ने उम्र का पैमाना बताते हुए बाबूलाल गौर और सरताज का टिकट काट दिया था लेकिन यहां पर बीजेपी हाइकमान को भी शिवराज के आगे नतमस्तक होना पड़ा। बुधनी की कमान युवा हाथों में नहीं बल्कि एक बुजुर्ग के हाथों में होगी।

शिवराज के बेटे को टिकट मिलने की थी अटकलें

माना जा रहा था कि शिवराज खुद नहीं बल्कि स्थानीय नेता उनके बेटे कार्तिकेय चौहान के नाम को आगे बढ़ाएंगे। इनका नाम भी संगठन की तरफ से बढ़ाया गया लेकिन भाई-भतीजावाद के चलते शिवराज के बेटे का नाम सामने नहीं लाया गया बल्कि जब टिकट का फैसला हुआ तो कार्तिकेय ने अपना बयान दिया। उन्होंने कहा कि वह बुधनी विधानसभा चुनाव प्रचार में जुड़ेंगे। बीजेपी की जीत के संकल्प के साथ रमाकांत भार्गव (Ramakant Bhargava) का प्रचार करेंगे। कार्तिकेय ने कहा कि दादा रमाकांत भार्गव पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं, वे बुधनी के योग्य प्रत्याशी हैं। दादा मेरे पितातुल्य हैं, मेरे लिए तो कोई अंतर ही नहीं है। पहले की तरह ही पूरे समर्पण के साथ प्रचार में जुटूंगा।

कांग्रेस का कमजोर कैंडिडेट!

कांग्रेस ने उस प्रत्याशी को उतारा है जिनपर पहले से ही कई आरोप हैं। इन पर विदिशा संसदीय चुनाव में बीजेपी से लेनदेन का आरोप लगा। अपना फार्म समय पर नहीं भरने के चलते सुषमा स्वराज को वॉक ओवर मिल गया था। इन पर आरोप लगा कि राजकुमार पटेल ने बीजेपी से इसके लिए लम्बा लेन-देन किया। पार्टी ने इनको बाहर का रास्ता भी दिखा दिया था लेकिन दिग्विजय सिंह के खास होने का फायदा मिला और इन्हें फिर से टिकट मिला, हालांकि कांग्रेस के लोग इनको टिकट मिलने से नाराज हैं।

सपा भी मैदान में, मुकाबला हुआ त्रिकोणीय

समाजवादी पार्टी ने बुधनी विधानसभा क्षेत्र से अर्जुन आर्य को मैदान में उतरा है। अर्जुन आर्य को मैदान में उतारने से इंडिया गठबंधन की दरार सबके सामने आ गई है। कांग्रेस के बागी को सपा ने बुधनी में कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार पटेल के सामने उतारा है। आपको बता दें कि अर्जुन आर्य का नाम 2018 में भी चला था लेकिन तब पार्टी ने अरुण यादव को मैदान में उतारा था। आर्य को दिग्विजय सिंह का करीबी माना जाता था लेकिन दिग्विजय ने उनके सबसे खास राजकुमार पटेल को मैदान में उतारा है। हालांकि माना जा रहा है कि राजकुमार के आने से बीजेपी के लिए मुकाबला एक तरफा हो गया है।

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